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बलिया के चहुंमुखी विकास में विवि निभाए सकारात्मक भूमिका : हरिवंश

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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि बलिया के चहुंमुखी विकास में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय को अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते हुए कार्य करना होगा। वह बुधवार को विश्वविद्यालय सभागार में लिविंग लिजेंड्स ऑफ बलिया फोरम के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
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सम्मेलन में रोल ऑफ लिविंग लिजेंड्स इन द होलिस्टि डेवलपमेंट के आयोजन में उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. जगदीश शुक्ल को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर उपसभापति ने अनुभवों व संघर्ष के दिनों के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर व बसन्तपुर गांव से जुड़े अपने रिश्तों को भी साझा किया। कहा कि बलिया की भूमि ऋषियों, विद्वानों व बागियों की धरती है। यहां एक अलग तरह की ऊर्जा है। चंद्रशेखर जैसी ज्वाला फिर यहां से निकले, ऐसा विश्वविद्यालय के माध्यम से कैसे हो, इस पर विचार करना होगा।
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कहा कि पर्यावरण संरक्षण में, नवीन कृषि के क्षेत्र में, गांवों को बेहतर बनाने में, ग्रामीण पर्यटन विकसित करने में, बलिया में पंजाब जैसी कृषि का विकास करने में विश्वविद्यालय अपनी भूमिका दर्ज कराएं तो देश व पर्यावरण हित में बेहतर पहल होगी।
प्रो. शुक्ल ने कहा कि कोई भी संस्था समाज को बदलने में सहायक होती है। इस दिशा में बेहतर कार्य के लिए विवि परिवार को धन्यवाद दिया। बताया कि मैं आइंस्टीन व गांधी का फैन हूं।
बलिया में पहले इंडस्ट्रीज थीं, पर आज बंद हैं। इस दिशा में हम सबको सोचना होगा। यहां कृषि के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। सुरहा ताल यहां के लिए एक बड़ा संसाधन है।
इनकी रही उपस्थिति : कार्यक्त्रस्म में प्रो प्रतिभा पांडेय, प्रो जेपी एन पांडेय, प्रो आरके चौबे, डॉ अवनींद्र सिंह, निर्भय नारायण सिंह, प्रो आरएन मिश्र, प्रो नीरजा सिंह, प्रो अखिलेश राय, प्रो जैनेंद्र पांडेय व प्रो निशा राघव आदि रहे।
कुलपति ने मूलभूत समस्याओं को रखा
कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने विश्वविद्यालय की ओर से कृषि, पर्यटन, पौराणिक व अन्य क्षेत्र में की जा रही पहल को विस्तार से बताया। कहा कि यहां की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लग जाए तो बलिया का कोई सानी नहीं है। उन्होंने बलिया के जलभराव व अन्य मूलभूत समस्याओं से भी अवगत कराया। मंगलाचरण एवं कुलगीत की प्रस्तुति प्रद्युम्न उपाध्याय, संचालन डॉ प्रमोद शंकर पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजय कुमार चौबे ने किया।
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