बलिया। टोंस नदी के बाएं किनारे पर स्थित बघड़ा की मठिया और गंगहरा में 5.87 करोड़ और मंगई नदी के दाएं किनारे पर स्थित मिल्की और मझरिया में 3.26 करोड़ से चल रहे कटानरोधी परियोजनाओं के लिए शासन न लगभग ढाई करोड़ की धनराशि और जारी की है। इससे इन परियोजनाओं को गति मिलेगी। नरही के मिल्की एवं कोट मझरियां में हो रहे मगई नदी के कटान से बचाव के लिए सरकार की ओर से 3.26 करोड़ की परियोजना को स्वीकृत करते हुए अभी तक मात्र 32 लाख रुपए का आवंटन किया था। क्षेत्र इस साल भी कटान के मुहाने पर बसे लोगों को मगई नदी से होने वाले कटान के खतरे की आशंका बनी हुई है। हालांकि मंगई नदी रामपुर गांव के पास टोंस नदी में समाहित हो गई है, लेकिन मंगई नदी का कटान इन गांव के लिए अभिशाप बना हुआ है। यदि कटान को रोकने के लिए पहले ही ठोस कदम उठा लिया जाता तो मिल्की और कोटमझरिया को कटान से बचाया जा सकता था। मंगई नदी के कटान को रोकने के लिए दौलतपुर और नरही में बोल्डर गिरा कर कटान को रोकने के लिए उपाय तो किए गए हैं, लेकिन देखना यह है कि कितना कारगर साबित होते हैं ये देखने लायक होगा। पिछले साल गंगा के कटान को रोकने के लिए इच्छा चौबे का पूरा गांव के सामने ठोकर का निर्माण कराया गया। बाढ आने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया लेकिन वह भी अभी आधा अधूरा ही है। मिल्की और कोट मझरिया के ग्रामीणों द्वारा पिछले कई सालों से कटान रोकने के लिए ठोकर की मांग की जा रही थी। परियोजना के लिए 139.32 लाख की धनराशि और दी गई है। वहीं, सागरपाली क्षेत्र गंगहरा और बघडा के मठिया में पूर्व के बाढ़ में किसानों की सैकड़ों एकड़ से ऊपर उपजाऊ जमीन कटान में नदी में विलीन हो गई। धीरे-धीरे कटान गांव के आबादी के तरफ रुख कर रहा था। इसको लेकर काफी चिंता बनी हुई थी। किसानों ने जिला प्रशासन गुहार लगाई थी। यहां कटानरोधी कार्य के लिए 5.87 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति देते हुए 64 लाख की धनराशि जारी की गई थी। कटान को रोकने के लिए बाढ़ विभाग के तरफ से बोल्डर का कार्य कराया जा रहा है। अब शासन की ओर से 117.09 लाख की धनराशि और जारी की गई है। इससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद जगी है।