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ट्रेनों की संख्या एक-तिहाई, चौथाई भी नहीं रह गई यात्रियों की संख्या

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माडल रेलवे स्टेशन पर के प्लेटफार्म नंबर एक पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : BALLIA
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बलिया। कोरोना काल में बलिया से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या जहां एक तिहाई रह गई है, वहीं यात्रियों की संख्या चौथाई भी नहीं रह गई। पैसेंजर और इंटरसिटी एक्सप्रेस के न चलने के कारण जिले के देहात इलाकों और आसपास के जनपदों में जाने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक्सप्रेस ट्रेनों में बिना रिजर्वेशन किसी को भी यात्रा की अनुमति न होने से यात्री परेशान हैं। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए प्राइवेट वाहन संचालकों ने भी उनका दोहन शुरू कर दिया है। किराए के नाम पर यात्रियों से मनमानी वसूली की जा रही है। स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मार्च में लगाए गए लॉकडाउन से पहले बलिया रेलवे स्टेशन से होकर कुल 36 जोड़ी ट्रेनें गुजरती थीं। उस समय इन ट्रेनों से रिजर्वेशन कराकर प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोग अपना सफर शुरू करते थे। 25 हजार से भी अधिक स्थानीय यात्री रोज चलते थे। उस समय रेलवे को प्रतिदिन रिजर्वेशन वाले यात्रियों से लगभग नौ लाख 50 हजार और जनरल टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों से लगभग चार लाख रुपये की आमदनी होती थी। स्टेशन अधीक्षक के अनुसार, इस समय जिले से होकर मात्र 13 जोड़ी ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इनसे प्रतिदिन रिजर्वेशन कराकर लगभग 6600 लोग प्रतिदिन बलिया रेलवे स्टेशन से अपना सफर शुरू कर रहे हैं। जबकि जनरल टिकट पर यात्रा इस समय प्रतिबंधित है, क्योंकि उन्हें भी रिजर्वेशन काउंटर या आनलाइन ही सीट रिजर्व कराना पड़ रहा है। इन यात्रियों से इस समय रेलवे को प्रतिदिन लगभग पांच लाख 50 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस प्रकार रिजर्वेशन कराकर सफर करने वाले यात्रियों से रेलवे को होने वाली कमाई सिर्फ 40 प्रतिशत रह गई है। जबकि जनरल टिकट की कमाई शून्य हो गई है।
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