बलिया। गंगा की कटान से एनएच-31 को बचाना प्रशासन के लिए अब चुनौती पूर्ण बनता जा रहा है। क्योंकि पिछले वर्ष बाढ़ के समय नदी हैबतपुर गांव के सामने एनएच-31 महज 300 मीटर की दूरी पर बह रही थी। नदी का रुख भी एनएच की तरफ हो गया था। एनएच को बचाने के लिए विभाग ने शासन को पत्र लिखा था। शासन की पहल पर एनएच को बचाने के लिए नई दिल्ली से तकनीकी कमेटी ने एक पखवाड़े पूर्व मौके पर सर्वे किया था। कमेटी ने एनएच-31 को कटान से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षात्मक कार्य कराने का सुझाव दिया था। कारण कि तमसा नदी इसके पहले मुबारकपुर गांव के सामने गंगा में मिल रही है। ऐसे में इस प्वाइंट पर बाढ़ के समय खतरा बढ़ने का अंदेशा जाहिर किया है। इस जगह से नदी की दूरी मात्र 230-300 मीटर ही रह गई है। बाढ़ विभाग की तरफ से इस स्थल से कुछ दूरी पर माल्देपुर के सामने कटान को रोकने के लिए स्ट्रीम कटर बनाने का कार्य चल रहा है। बाढ़ विभाग को उम्मीद है कि गंगा की धारा को मोड़ लिया जाएगा। इस परियोजना का काम भी लगभग अंतिम चरण में है। इसके कुछ ही दूरी पर गंगा नदी के एनएच के करीब बहने से एनएचआई को अपनी सड़क की चिंता है। ऐसे में तकनीकी कमेटी के रिपोर्ट पर शासन ने एनएचआई से कार्ययोजना का प्रस्ताव मांगा है। एनएचआई ने कटान स्थल पर 30 करोड़ का स्ट्रीम कटर बनाने का प्रस्ताव भेजा है। अब केवल शासन से बजट जारी होने का इंतजार है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में 100 मीटर स्ट्रीम कटर बनवाया जाएगा। एनएचआई परियोजना निदेशक श्रीधर पाठक ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बचाने के लिए परियोजना प्रस्तावित है। इस स्थल पर नदी के करीब होने के कारण सुरक्षात्मक कार्य कराना आवश्यक है। धनराशि स्वीकृत होते ही कार्य कराया जाएगा।