बलिया। जनपद में संक्रमण व मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को डेंगू के तीन नए केस सामने आने के बाद डेंगू का आंकड़ा 10 पर पहुंच चुका है। मलेरिया विगाग की सर्वे में लगी टीमों को बंद पड़े कूलरों में पानी एकत्रित हुआ मिल रहा है। गमलों में कई दिनों तक जमा पानी मिल रहा है। लोग स्वयं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है। जिससे डेंगू बढ़ रहा है। डेंगू से डरने की नहीं है, बल्कि सावधान और जागरूक रह कर बचा जा सकता है। एडीज़ मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह दिन में काटता है। पाँच से छह दिन बाद डेंगू के लक्षण नजर आते हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील यादव ने बताया कि डेंगू के मरीजों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर जिला अस्पताल में 10 बेड, सीएचसी पर पांच बेड व पीएचसी पर दो बेड आरक्षित हैं। डेंगू का लार्वा साफ पानी में पनपता है। घर और आसपास साफ पानी इकट्ठा न होने दें।साफ-सफाई और जागरूकता से काफी हद तक मच्छरों को पनपने से रोका जा सकता है। विभाग हर रविवार मच्छरों पर करें वार के नाम आए अभियान चला रहा है। डेंगू का पता लगाने के लिए एलाइजा जांच बेहद जरूरी है,जिससे डेंगू की पहचान होती है।
डेंगू बीमारी के लक्षण व बचाव
शरीर के त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज़ बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, दस्त आदि डेंगू के लक्षण हैं। स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय रैपिड रिस्पांन्स टीम द्वारा निरोधात्मक कार्यवाही के साथ जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, सोर्स रिडक्शन, ज्वर पीड़ित मरीजों के रक्त नमूनों की जाँच, ब्लीचिंग पाउडर, नालियों में लार्वी साइडल का छिड़काव कर रही है। चिकित्सक मच्छरदानी का प्रयोग करने और बुखार होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाने की सलाह दे रहे। बुखार होने पर तरल पदार्थों सेवन करें।