बलिया। जिला महिला अस्पताल का सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू वार्ड) में नवजातों की संख्या इन दिनों काफी बढ़ गई है। इस यूनिट में 12 वार्मर और छह फोटोथेरेपी मशीनें लगी हैं। एक-एक मशीन पर दो से तीन बच्चों को भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। शुक्रवार को यहां 35 नवजात भर्ती थे। जगह न होने से बेहतर उपचार के लिए तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों की राह देखनी पड़ रही है। प्राइवेट में अप्रशिक्षित स्टाफ और बेहतर इलाज न मिलने से बच्चों की असमय मौत भी होती है। साथ में मनमाना पैसा वसूला जाता है।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 प्रसव होते हैं। एक दर्जन बच्चों को विभिन्न रोगों के चलते एसएनसीयू वार्ड के लिए रेफर किया जाता है। पिछले माह कुल 290 बच्चे भर्ती हुए। 33 गंभीर बच्चों को रेफर किया गया। वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर होने के बावजूद 24 घंटे नहीं रहते है। रात में स्टाफ नर्स के भरोसे एसएनसीयू का संचालन हो रहा है।
ये होनी चाहिए व्यवस्था
नवजात बच्चे पीलिया, कम वजन, संक्रमण, देर से रोने या नहीं रोने वाले बच्चे, पेट में गंदा पानी जाने, झटके वाले और अन्य रोगों की चपेट में आने वाले बच्चों को भर्ती किया जाता है। नवजात जब तक पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, तब तक इन्हें एसएनसीयू में चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है। बच्चों को भर्ती होने के बाद दवा से लेकर हर व्यवस्था निशुल्क मिलती है। बच्चे की मां के लिए भी बेड व भोजन निशुल्क मिलता है।
एसएनसीयू वार्ड में बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जगह और स्टॉफ की कमी के कारण अब तक नहीं बढ़ पाया है। पूरे जिला का लोड होने के कारण और बेड की संख्या कम होने के कारण बच्चों को मजबूरन रेफर करना पड़ता है। कम संसाधन के बावजूद बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। -डॉ. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल