बलिया। जिला अस्पताल में हीमोफीलिया का इलाज नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को वाराणसी और लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। एक साल में करीब 25 मरीजों को रेफर किया जा चुका है।
जिले भर से हीमोफीलिया के मरीज इंजेक्शन और फैक्टर के लिए जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन वहां न तो फैक्टर उपलब्ध हैं न ही उसे चढ़ाने की व्यवस्था है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को इलाज के लिए वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। हीमोफीलिया का इलाज बहुत महंगा है। लिहाजा रोगियों को इसे जारी रखना मुश्किल हो जाता है।
रक्तस्राव होने हीमोफीलिया के मरीज को जब फैक्टर शुरू किया जाता है तो उसको हर सप्ताह इसकी जरूरत होती है। एक बार फैक्टर चढ़वाने का खर्चा 10 से 12 हजार रुपया आता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में सुविधा न मिलने पर अधिकांश मरीज इलाज ही नहीं करा पाते हैं।
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