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Ballia News: टीम ने खंगाली सीवर परियोजना की पत्रावली

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बलिया। जल निगम में हुए सीवर में अनियमितता के कारण ही 17 वर्षों के बाद भी नगरवासियों को सुविधा नहीं मिल सकी। जांच के पांच वर्ष बाद जल निगम ने कार्रवाई शुरू की है। प्रबंध निदेशक की ओर से गठित टीम सीवर कार्यों का भौतिक सत्यापन और अभिलेखों की पड़ताल शुरू कर दी है। इसमें कइयों की गर्दन फंस सकती है।
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नगर में सीवर निर्माण में हुई अनियमितता के मामले में अलग-अलग आरोपों में तत्कालीन अधिकारियों, कार्यदायी संस्थाओं पर मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रबंध निदेशक की ओर से गठित टीम जिले में पहुंच चुकी है। टीम ने सीवर परियोजना से संबंधित पत्रावलियों को खंगालना शुरु कर दिया है। टीम के कुछ सदस्यों ने सिविल लाइन जोन व सिटी जोन के सीवर लाइन की भी पड़ताल की है।
हालांकि विभागीय अधिकारी कुछ भी बताने से बच रहे हैं। टीम को 25 अगस्त तक प्रबंध निदेशक को पूरी रिपोर्ट देनी है। इसको लेकर विभाग में खलबली मची है। बताया जाता है कि सीवर लाइन में कई तरह की धांधली की गई है और इसमें कइयों की गर्दन फंस सकती है।
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बता दें कि नगर को स्वच्छ रखने के लिए वर्ष 2006-07 में सीवर योजना की शुरुआत कुल 97.22 करोड़ की धनराशि से हुई। इस धनराशि से सीवर व एसटीपी का निर्माण होना था। सीवर निर्माण के लिए शहर को दो भागों सिटी जोन व सिविल लाइन जोन में बांटा गया था। सिटी जोन में जहां 27.90 करोड़ से होनी थी। बाद में पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ हो गई। वहीं, सिविल लाइन जोन में 44.7231 करोड़ से होनी थी, जिसकी पुनरीक्षित लागत 52.2272 करोड़ की गई।
सीवर निर्माण के लिए बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया और विभाग ने इस कार्य को मेसर्स ज्योति बिल्डर को ठेका दे दिया लेकिन सीवर योजना भ्रष्टाचार व अनियमितता की शिकार गई। इसका परिणाम रहा कि 17 वर्षों तक परियोजना अधूरा रहा जबकि अधिकारी मनमाने तरीके से 100 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुके हैं। इतना ही नहीं, वर्ष 2018 में जल निगम निदेशालय ने इसका संज्ञान लिया और टीएसी जांच कराई। इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई लेकिन पांच वर्ष तक मामला ठंडे बस्ते में रहा। इस बीच अधिकांश अधिकारी अलग-अलग समयों में सेवानिवृत्त होते गए।

तीन वर्ष पहले कार्यदायी संस्था हो चुकी है डिफाॅल्टर
बलिया। शहर में सीवर निर्माण के लिए जल निगम ने ज्योति बिल्ड टेक को ठेका दिया था लेकिन इस कार्यदायी संस्था ने निर्माण में खूब खेल किया। जल निगम के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने दावा किया था कि विभिन्न जांचों के आधार पर शासन ने संस्था को डिफाॅल्टर घोषित कर दिया। हालांकि यह संस्था झारखंड में भी इसी तरह का कार्य पूरा नहीं करने पर वर्ष 2020 में ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है।


नकली बैंक गारंटी देने के मामले में भी कार्यदायी संस्था पर दर्ज है मुकदमा
सीवर योजना में अनियमितता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शुरुआत ही फजीवाड़ा से हुई। कुल 97.22 करोड़ की परियोजना के लिए कार्यदायी संस्था को तीन करोड़ छह लाख 76 हजार एक सौ की बैंक गारंटी देनेी थी लेकिन जो जांच नकली मिली। जांच में सामने आया कि 30 लाख की बैंक गारंटी को तीन करोड़ छह लाख 76 हजार एक सौ किया गया है। तत्कालीन एक्सईएन कायम हुसैन ने इस बाबत तत्कालीन डीएम को पत्र भी लिखा था। हालांकि चार माह पहले इस मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है।


वर्जन
जल निगम की टीम जिले में आई है। कई जगह सीवर के कार्यों को देखा। इसके बाद, जल निगम नगरीय कार्यालय जाकर पत्रावलियों को भी देखा है। अभी टीम रुकी है और जांच जारी है। - अखिलेश कुमार यादव, एसडीएम सदर और प्रभारी ईओ नगरपालिका, बलिया
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