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बागी धरा से रहा धरतीपुत्र का अगाध लगाव-

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बलिया। राजनीतिक जीवन में नेताजी के नाम से मशहूर रहे मुलायम सिंह यादव का बागी धरा से अगाध लगाव रहा। हालांकि इसके मूल में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का राजनीतिक वरदहस्त था। बावजूद इसके, जिले की जनता हमेशा मुलायम को अपना लाल बनाए रही। चाहे जिले के जनप्रतिनिधियों को सरकार में शामिल करने का अवसर हो अथवा कार्यकर्ताओं द्वारा जिले में आने के आमंत्रण की बात रही हो, नेताजी ने कभी किसी को निराश नहीं किया। यही कारण रहा कि चुनावी दिनों में प्रतिकूल परिस्थितियों में मुलायम के अनुरोध को बलियावासियों ने अक्षरश: अनुपालन करते रहे। वर्ष 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर तो वे एक पखवारे में दो बार बलिया आकर शोक संतप्त परिवारीजनों को ढाढ़स भी बधाया था। उनके निधन की खबर सुनकर जनपदवासी मर्माहत है।
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वर्ष 1990-91 में जब समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) का गठन किया तो मुलायम सिंह यादव पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह के जनता दल से रिश्ता तोड़कर सजपा में शामिल हो गए। हालांकि जल्द ही उनका चंद्रशेखर की पार्टी से भी मोहभंग हो गया और 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया। चंद्रशेखर के अति करीबी रहे बलिया के ही शोभनथहीं के निवासी छोटे लोहिया की संज्ञा से विभूषित जनेश्वर मिश्र को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया। इसके बावजूद, मुलायम सिंह यादव ने भी अंतिम समय तक पूर्व प्रधानमंत्री का सम्मान किया। लोकसभा चुनाव में कभी भी चंद्रशेखर के खिलाफ बलिया में कोई उम्मीदवार नहीं दिया।
जिले में आखिरी बार नारद के गांव आए थे नेताजी
मुलायम सिंह यादव अंतिम बार 15 दिसंबर 2016 को जिले में आए थे। देवरिया भगवानपुर मार्ग पर मुलायम का हेलीकॉप्टर उतरा था। नारद राय के पैतृक मकान के आगे फील्ड में लगे मंच से मुलायम ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया अपने साथ लाए थैले में गिफ्ट भी दिया। उसके बाद मंच पर बैठे परिजनों संग फोटो सेशन करवाने के बाद आवास में जाकर भोजन किया और रवाना हो गए।
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