बलिया। पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सरकार ने रुपये को रसातल में पहुंचा दिया है। इसके लिए उसे देश से माफी मांगना चाहिए। देश पर बढ़ रहे कर्जे पर भी स्पष्टीकरण दे। कुछ शब्दों को असंसदीय घोषित करने भर से सरकार आलोचना से बच नहीं सकती। जनता उसके वैकल्पिक शब्द खोज लेगी। तानाशाह की जगह थानाशाह और लाठीशाह का इस्तेमाल होने लगा है।
अपने आवास पर सोमवार को को बातचीत में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को चौपट करने वाली सरकार आलोचना से बचने के लिए तानाशाह, जुमलाजीवी, जयचंद, अंट-शंट, करप्ट, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना, निकम्मा जैसे शब्दों को असंसदीय घोषित करके अपनी कारस्तानी पर पर्दा डालने की फिराक में है। उसकी यह कोशिश सफल होने वाली नहीं है। इन शब्दों का विकल्प ढूंढ लिया जाएगा और वे ज्यादा चुभने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि अब लोग तानाशाह की जगह थानाशाह, लाठीशाह बोलने लगे हैं। जुमलाजीवी की जगह लबार बोलने लगे हैं। ये शब्द और तीखे हैं। जैसे-जैसे आमजन की आय घटेगी और चंद पूंजीपतियों की आय बढ़ेगी तो लोगों के शब्द और तीखे होते जाएंगे। देश की आर्थिक स्थिति श्रीलंका जैसी होगी तो लोगों की प्रतिक्रिया भी श्रीलंका जैसी ही होगी। सरकार को लोगों को बताना होगा कि कुछ पूंजीपति मित्रों को कमवाने, उनकी बोगस कंपनियों को कर्ज दिलवाकर बैंकों को लुटवाने की वजह से रुपये की दुर्गति हुई है। इसके लिए उसे देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ेगी।