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Ballia News: अब नहीं सुनाई देती गौरैया की चीं-चीं

Sun, 19 Mar 2023 11:36 PM IST
वाराणसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलिया
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बलिया। एक दौर था जब पौ फटते ही हमारे घर आंगन और द्वार में फुदकने वाली गौरैया की चीं-चीं की मधुर गूंज आसपास के वातावरण को सुहाना बना देती थीं। प्रकृति सौंदर्य का यह अद्भुत प्रक्रम वर्षों पूर्व सार्वजनिक स्थानों पर सुनाई देता था। परंतु आज यह मनभावन कलरव विलुप्त प्राय हो चला है।
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जानकार इसे बढ़ते शहरीकरण, वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, मोबाइल टावर से उत्सर्जित रेडिएशन आदि को प्रमुख कारण माना रहे हैं। शिक्षक व साहित्यकार डॉ. नवचंद्र तिवारी बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों या आबादी वाले क्षेत्रों में विरले ही अब गौरैया की आवाज सुनाई देती है। बताते हैं कि नेचर फॉरएवर सोसायटी आफ इंडिया एवं फ्रांस के इको एमआईएस फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से 20 मार्च 2010 से ही यह दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
घरेलू गौरैयों के संरक्षण व संवर्धन के निमित्त जागरूकता हेतु विद्यालयों सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजन होते हैं। आज बढ़ते शहरीकरण, वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, मोबाइल टावर से उत्सर्जित रेडिएशन आदि से इनका अस्तित्व विलुप्त के कगार पर है। विशालकाय इमारतें, कटते पेड़-पौधों के कारण इन्हें घोंसला बनाने में जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
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जैव विविधता में इनकी मुख्य 26 प्रजातियां हैं, जो विशेष रूप से एशिया, अफ्रीका, यूरोप आदि महाद्वीपों में पाई जाती है। यदि हम इनके स्वभाव और सुविधा के अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण नहीं करेंगे तो गिद्ध की तरह यह प्रजाति भी अब केवल पढ़ने को ही मिलेगी। इसलिए प्रकृति के इस अनुपम उपक्रम को बनाए रखने हेतु इन्हें अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करने में हमारी सबकी भूमिका होनी चाहिए।
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