बलिया। जिले में पहले कोहरे की शुरुआत मंगलवार को हुई। जबरदस्त कोहरा देख लोग हैरत में रह गए। ठंड के साथ ही कंपकंपी रही। हालत यह रही कि सड़कों पर वाहन धीमी गति से लाइट जलाते हुए गुजर रहे थे। एक घंटे की दूरी तय करने में लोगों को तीन से चार घंटे का समय लग गया। हालांकि दोपहर में गुनगुनी धूप निकली तो लोगों ने राहत महसूस की। नरही : क्षेत्र में मंगलवार की भोर में घने कोहरे का जबरदस्त असर देखने को मिला। आलम यह रहा कि सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं। हालांकि ठंड में कोई ज्यादा इजाफा नहीं हुआ लेकिन घने कोहरे के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त जरूर हुआ। वाराणसी जाने वाले यात्रियों को रोडवेज की बसें 9 बजे तक नहीं मिल सकी। ऐसे में मजबूरन उन्हें घर लौटना पड़ा। बेल्थरारोड : ठंड में बढ़ोत्तरी के साथ ही मंगलवार की सुबह घना कोहरा छाए रहने से सड़कों पर वाहनों का आवागमन कम रहा तथा लोगों की आवाजाही नहीं के बराबर रही। कोहरा दोपहर तक रहा ऐसे में लोगों को धूप तक नहीं मिल सकी। ठंड से अधिकांश लोग घरों में दुबके रहे। क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से नगर क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर अलाव जलाने के साथ ही गरीबों और निराश्रितों के बीच कंबल वितरण की मांग की है जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि अभी ठंड में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है और इस बीच शुरू हुआ कोहरा लगभग सभी फसलों के लिए लाभदायक है। बारिश हुए काफी दिन बीत गए हैं तो ऐसे में कोहरे से फसलों को राहत मिलेगी। बताया कि खासकर यह कोहरा दलहनी फसलों के लिए बहुत ही लाभदायक होगा। लगातार कई दिनों तक कोहरा होने की स्थिति में आलू की फसल प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर दवाओं का छिड़काव शुरू कर दें। उधर, घने कोहरे का असर इस कदर रहा कि गाजीपुर से लौटी एक बरात में शामिल दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी रास्ता भटक कर रसड़ा जा पहुंची। जबकि उसे छपरा जाना था। दूल्हे दीपक ने बताया कि भोर में चार बजे ही विदाई हो गई थी। उम्मीद थी कि दिन में आठ बजे तक छपरा पहुंच जाएंगे, लेकिन पहले तो कोहरे के कारण गाड़ी स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी और बाद में चालक रास्ता ही भटक गया। जब तक कुछ समझ में आता गाड़ी रसड़ा में थी। लोगों से पूछते-पूछते दिन में दस बजे तक बलिया पहुंचे हैं। वाहनों के पहिए पर ब्रेक का आलम ये था कि भोर में दुल्हन की विदाई कराकर लौट रहे दूल्हे की गाड़ी कोहरे में भटक गई। इसके बाद वे घंटों दूसरे रास्तों पर भटकने के बाद घरों को पहुंच सके।