बलिया। सेटेलाइट से भी धान की पराली व फसल अवशेषों को जलाने की निगरानी की जाएगी।
बलिया जनपद में करीब 1.17 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है, दूसरे नंबर पर गेहूं का क्षेत्रफल है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को छोड़ दें, तो जिले में धान की खेती बड़े क्षेत्रफल में होती है। यही कारण है कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए शासन व कृषि विभाग अलर्ट है। पराली जलाने वालों पर निगाह रखने के लिए सेटेलाइट की मदद ली जाएगी। इसमें लगे सेंसर अग्नि जनित स्थल की रोड मैपिंग कर मैसेज के जरिये संबंधित क्षेत्र के सचल दस्तों को संदेश भेजते हैं। इसके बाद दिए गए अक्षांश व देशांतर पर जाकर जांच के बाद उत्तरदायी किसानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। इस कार्य की राजस्व, कृषि, पंचायत राज, नगरपालिका एवं नगर पंचायतों को जिम्मेदारी दी गई है।
पराली की बनाएं खाद
संसाधनों का प्रयोग कर पराली, फसल अवशेषों की खाद बनाएं। इससे खेती व पर्यावरण दोनों से सेहत सही रहेगी। साथ ही जनपद, राज्य व देश को प्रदूषण मुक्त करने में योगदान रहेगा। टीमों की निगरानी के साथ सेटेलाइट से नजर रखी जाएगी।
पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी
जीवांश कार्बन में होगी वृद्धि
धान की पराली एवं फसल अवशेषों को जलाने के बजाए किसान इसे सड़ाकर खाद बनाएं। इससे भूमि में जीवांश कार्बन में वृद्धि होगी और सूक्ष्म जीव सुरक्षित रह सकेंगे। - मनीष सिंह,उप कृषि निदेशक।