बलिया। नगर निकाय चुनाव में प्रचार-प्रसार के साथ ही मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रत्याशियों ने खूब पैसे खर्च किए मगर अब हिसाब देने से कतरा रहे हैं। नगर पालिका/पंचायत अध्यक्ष और सदस्य पद के लिए कुछ को छोड़ ज्यादातर ने खर्च का ब्योरा नहीं दिया। इनमें सबसे अधिक संख्या हारे हुए प्रत्याशियों की है।
जिला प्रशासन ब्योरा जमा नहीं करने वाले सभी प्रत्याशियों को एक और मौका देने के मूड में है। इसके लिए अगले हफ्ते निकाय निर्वाचन से जुड़े विभागों के अधिकारियों की एक बैठक होगी, जिसमें ब्योरा जमा करने के लिए अंतिम तिथि को लेकर मुहर लगेगी।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो कोषागार की लेखा टीम को अब तक 60 फीसद उम्मीदवारों ने अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा दिया है। इनमें करीब 40 प्रतिशत हारे हुए उम्मीदवार है, जिन्होंने चुनाव समाप्त होते ही निर्वाचन के दौरान हुए आय-व्यय का ब्योरा संबंधित प्रपत्रों के साथ कोषागार में जमा कर दिया। हालांकि चुनाव के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने यह निर्देश दिया था कि जिस प्रत्याशी ने खर्च का हिसाब नहीं दिया, उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रवीन्द्र कुमार ने भी प्रत्याशियों को निर्वाचन में किये गये व्यय का विवरण निर्धारित प्रारूप (व्यय रजिस्टर) पर शपथ-पत्र के साथ निर्वाचन परिणाम घोषणा की तिथि से तीन माह के अन्दर अनिवार्य रूप से दाखिल करने का निर्देश दिया है। अन्यथा उनकी जमानत धनराशि जब्त मानी जाएगी।
पिछली बार इसी फेर में 180 से अधिक प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई थी। नगर निकाय चुनाव में नगर पालिका/नगर पंचायत अध्यक्ष के 135 व सभासदों के लिए 815 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें से करीब 570 उम्मीदारों ने अब तक चुनावी खर्च का ब्यौरा जमा कर दिया है। मगर ज्यादातर ने प्रभारी अधिकारी निर्वाचन व्यय लेखा/मुख्य कोषाधिकारी के पास हिसाब नहीं दिया।
दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में खर्च का ब्यौरा नहीं उपलब्ध कराने पर अगले चुनाव में उम्मीदवारी प्रतिबंधित कर दी जाती है मगर निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक नगर निकाय चुनाव में ऐसी सख्ती का प्रावधान ही नहीं है। ब्यौरा नहीं देने वालों की सिर्फ जमानत राशि जब्त करने का नियम है। यही वजह है कि तमाम प्रत्याशी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे।
करीब 60 उम्मीदवारों ने ही खर्च का ब्यौरा दिया। प्रशासन की तरफ से अब सभी उम्मीदवारों को चुनावी खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। - ममता सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी, बलिया