बलिया। धीरे-धीरे बढ़ती सर्दी के साथ कोहरे की चादर ने पैर पसारना शुरु कर दिया है, लेकिन जिम्मेदारों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं है। अलबत्ता सर्द भरी रातों में खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर गुजर बसर कर रहे निराश्रित लोग जरूर परेशान है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि निराश्रित लोगों के लिए शेल्टर होम में ठहरने की व्यवस्था है। लेकिन, निराश्रितों की मजबूरी का आलम यह कि शेल्टर होम में बिना आधार कार्ड, पहचान पत्र के प्रवेश नहीं मिलता, जिससे फुटपाथ पर जीवन काटना पड़ रहा है।
फुटपाथ पर बसर कर रहे सुभाष ने बताया कि आधार कार्ड या कोई भी प्रूफ न हो तो शेल्टर होम वाले दिक्कत करते हैं। जेब में जो कुछ पैसे भी होते हैं वो निकलवा लेते हैं। जब प्रशासन हम पर इतनी मेहरबानी कर ही रहा है तो हमारा आधार कार्ड, पहचान पत्र ही बनवा दें।
रमावती का कहना है कि डेढ़ साल से फुटपाथ पर रह रही हूं। मजबूरी में हमें फुटपाथ पर सोना पड़ता है। राजू ने बताया कि हमारे पास न आधार कार्ड है न पहचान पत्र। बनवाने की कोशिश की तो भी नहीं बना, इस कारण फुटपाथ पर सोना पड़ता है। कोतवाली के समीप स्थित आश्रय गृह के केयर टेकर विवेक ने बताया कि फिलहाल यहां दो लोग ठहरे हैं। वहीं, शहर के रेलवे स्टेशन, बालेश्वर मंदिर, सिनेमा रोड आदि इलाकों में फुटपाथ पर भी कुछ लोग सोने की तैयारी में थे। पूछने पर बताया कि अस्थाई रैन बसेरा के अभाव में वे फुटपाथ पर ही रात बिताते हैं।
शीघ्र ही अस्थायी रैनबसेरा का निर्माण कराया जाएगा। ददरी मेला के आयोजन के कारण इस कार्य में कुछ विलंब हुआ है।
- आत्रेय मिश्रा, उपजिलाधिकारी सदर/ प्रभारी ईओ, नगर पालिका बलिया