बलिया। शारदीय नवरात्र सोमवार से प्रारंभ होंगे। इस बार गज पर सवार होकर मां आएंगी। सूर्योदय से लेकर पूरे दिन भक्त कलश स्थापना कर सकेंगे। चार अक्तूबर को नवरात्र की पूर्णाहूति के साथ समापन होगा। नवरात्र तैयारी की तैयारी को लेकर शहर से ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों और घरों में साफ-सफाई एवं रंग रोगन का कार्य पूरे दिन चलता रहा। मंदिरों को फूलों से सजाया गया। दर्शन-पूजन के लिए प्रमुख मंदिरों के गेट चार बजे भोर से खोल दिए जाएंगे। पूजन की तैयारी को लेकर बाजारों में भीड़ रही। देवी मंदिरों के आसपास भी दुकानें तैयार हैं। सुरक्षा के भी प्रबंध किए गए है।
नवरात्र को लेकर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने ररिवार को छुट्टी के पूजन के लिए अपने घरों को तैयार किया। पूजन सामग्री आदि की खरीदारी की। घरों के साथ ही जनपद के शहर स्थित दुर्गा मंदिरों, ब्रह्माइन स्थित ब्राह्मणी देवी, शंकरपुर स्थित शांकरी भवानी, फेफना थाना के कपूरी गांव स्थित कपिलेश्वरी भवानी मंदिर, नरहीं थाना के कोरंटाडीह स्थित मंगला भवानी, रसड़ा के काली मंदिर, नीबू कबीरपुर व उचेड़ा स्थित चंडी भवानी, सिकंदरपुर के जल्पा-कल्पा मंदिर, मनियर के बुढ़ऊ बाबा मंदिर व नवका बाबा मंदिर, रेवती के पचरूखा देवी गायघाट मंदिर पर तैयारी चलती रही। इन मंदिरों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। घरों में कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे। सोनाडीह स्थित भागेश्वरी परमेश्वरी मंदिर और चंदाडीह स्थित मातु जी महारानी मंदिर आकर्षण का केंद्र होंगे। 27 सितंबर से बीचला पोखरा स्थित रामलीला मैदान में शुरू होने वाले लीला मंचन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। लीला कलाकार मंच पर अभिनय का रिहर्सल कर रहे हैं। नवरात्र, दुर्गा पूजा और रामलीला को लेकर क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ गई है।
मां के नौ स्वरुपों की होती है पूजा
नवरात्र में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की पूजा की जाती है। ये सभी मां के नौ स्वरूप हैं। प्रथम दिन घट स्थापना होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रत और पूजा का विशेष महत्व रहता है।
कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त दिन में 11.40 से 12.25 बजे तक।
कलश स्थापना का समय सुबह 6.02 से रात 10.00 बजे तक।