मौसम के हो रहे बदलाव के कारण मई जून की गर्मी इस वर्ष अप्रैल में ही पड़ने लगी। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। भीषण गर्मी से जन जीवन व फसलों पर प्रभाव पड़ने लगा है। दस बजे के बाद गर्म हवाएं चलने व तेज धूप होने की वजह से हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम के मिजाज को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को लगातार गर्मी और लू से बचाव की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज धीरे-धीरे अब आने लगे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में 1500 से बढ़कर 2000 मरीजों की हो गई है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. मनोज कुमार बुजुर्गों से लेकर बच्चों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने, ज्यादा पानी, ठंडी तासीर वाले फल का सेवन करने का सुझाव दे रहे हैं। डा. पंकज कुमार मरीजों व उनके परिजनों को लू व गर्मी से बचाव के लिए अन्य तरीके भी अपनाने के लिए कह रहे हैं। जिला सर्विलांस अधिकारी डा. अभिषेक मिश्रा की माने तो इस बार कई वर्षों बाद भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान है। कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को हीट वेव के खतरे को लेकर अलर्ट कर चुका हैं।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
तेज धूप के बीच लू (हीट वेव) से लोगों को हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसमें शरीर का तापमान अधिक हो जाता हैं। जिससे अचानक बैचेनी बढ़ जाती हैं। उल्टी होना, पानी की कमी से पेट दर्द व कई परेशानी महसूस होने लगता हैं, सिरदर्द, बेहोशी या दौरे पड़ने लगता है। सांस और दिल की धड़कन तेज तेज चलने लगती है। हीट स्ट्रोक लगने के बाद अगर समय से इलाज न मिले तो व्यक्ति की मौत की आशंका बढ़ जाती है।
हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय
बढ़ते तापमान के बीच हीट वेव से सावधानी अपना कर बचाव कर सकते हैं। शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखें। ज्यादा से ज्यादा पानी, जूस आदि लिक्विड डाइट लें। ठंडी तासीर का भोजन करे, मसालेदार खाने से परहेज करें। दोपहर के दौरान घर से कम से कम निकलें, जरूरी हो तो गमछा, धूप का चश्मा व पूरी बाह का कपड़ा पहनकर ही निकले। अचानक ठंडे से गर्म तापमान में या गर्म से ठंडे तापमान में जाने से बचें। अगर किसी को हीट स्ट्रोक हो तो उसे तत्काल ठंडी जगह पर ले जाएं। उसे ठंडा पानी, ओआरएस घोल या जूस पिलाएं ताकि डिहाइड्रेशन को कंट्रोल किया जा सके। अगर इस दौरान कुछ भी चिंताजनक लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि हीट स्ट्रोक के मामलों में देरी करना ठीक नहीं।