बलिया। खरीफ की फसलें तैयार होने की कगार पर हैं। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने रबी की तैयारी शुरू कर दी है। इस वर्ष खरीफ के दौरान काफी कम बारिश होने के कारण खासकर धान की रोपाई किसानों ने काफी कम की। इसके अलावा, खरीफ की फसलों की बुआई हुई लेकिन बाद में लगातार बारिश और बाढ़ से फसलों का नुकसान भी हुआ। इसके चलते इस बार कृषि विभाग की ओर से रबी बुआई का 13733 हेक्टेयर का दायरा बढ़ाया गया है।
इस वर्ष खरीफ के दौरान मानसून की दगाबाजी और पर्याप्त बारिश न होने से कारण खासकर धान की रोपाई काफी प्रभावित हुई। हालांकि बाद के महीनों में लगातार बारिश के चलते रोपे गए धान को तो संजीवनी मिली लेकिन अन्य कई फसलों को नुकसान भी पहुंचा। इसके अलावा, गंगा और सरयू में आई बाढ़ ने भी कई क्षेत्रों में खरीफ की फसलों को तबाह कर दिया। इसे लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं और रबी फसलों पर उम्मीद लगाए हुए हैं। आमतौर पर जून महीने के अंतिम सप्ताह में बारिश होने के बाद दो बार खेत की जोताई करते हैं तथा सितंबर व अक्तूबर में जोताई कर रबी की बोआई के लिए खेतों को तैयार किया जाता है। लेकिन इस वर्ष सितंबर महीने में बारिश हुई। अक्तूबर-नवंबर के महीने में गेहूं, चना, जौ, मसूर, सरसों आदि फसलें बोई जाती हैं। इन फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने रबी फसलों की बोआई आदि को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। इस वर्ष पिछले वर्ष के सापेक्ष 13733 हेक्टेयर अधिक रकबे में रबी की बोआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिला कृषि अधिकारी, धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि रबी फसलों को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है और लक्ष्य का निर्धारण भी कर दिया गया है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 13 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबा में रबी की बोआई कराने का लक्ष्य है।