बलिया। जिला महिला अस्पताल में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। अभी शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में हेपटाइटिस सी किट से गलत रिपोर्ट आने का मामला शांत नहीं हुआ कि अस्पताल प्रशासन के संरक्षण में बाबू व कर्मचारियों के परिवार व नाते रिश्तेदार के फर्मों से लाखों करोड़ों रुपये की खरीदारी होने का मामला सुर्खियों में आ गया है। आरोप है कि बिना प्रक्रिया के उक्त फर्मों से खरीदारी की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले का संज्ञान लेकर यदि भुगतान की जांच कराई जाएं तो करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार सामने आ सकता है।
जिला महिला अस्पताल में रोजाना चार से पांच सौ मरीज ओपीडी में आते हैं। वहीं, इमरजेंसी में रोज 30 से 35 प्रसव होते हैं। अस्पताल में 18 से 20 बेड का एसएनसीयू वार्ड संचालित होता है। जिसमें मरीजों को सभी सुविधाएं निशुल्क मिलती है। दवा व अन्य उपकरणों की आपूर्ति शासन द्वारा वेयर हाउस की जाती है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अस्पताल प्रशासन हर वर्ष स्टेशनरी, सर्जिकल सामान व आवश्यक सामग्री की खरीदारी और लघु निर्माण का काम बिना किसी प्रक्रिया के फर्मों से कराता है। जिसमें पूरी तरह नियमों और निर्देशों की अनदेखी की जाती है। इसमें दो फर्म अस्पताल में तैनात एक बाबू के नाते-रिश्तेदार व दो फर्म संविदा पर तैनात एक कर्मचारी के नाते-रिश्तेदारों के बताए जा रहे हैं। आंकड़ों की माने तो वर्ष 2021 से 23 तक उक्त फर्मों को लाखों करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया गया है। अभी वर्ष 2023-2024 में उक्त फर्मों से खरीदारी जारी है।
अस्पताल में दवाओं व सामानों की सप्लाई वेयर हाउस से होता है। कुछ सर्जिकल सामानों की खरीदारी लोकल स्तर पर की जाती है। अन्य किसी दूसरे फर्मों से खरीदारी नहीं होती है।- डाॅ. सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
जिला महिला अस्पताल में 2021 से हुई खरीदारी व भुगतान की पूरी जानकारी मंगवा कर मामले की जांच कराई जाएगी। अगर किसी बाबू या कर्मचारी की संलिप्तता या खरीदारी में लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-डाॅ. विजयपति द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी,बलिया।