बलिया। जनपद के गांवों में प्लास्टिक कचरा निस्तारण को लेकर कवायद तेज हो गई है। 32 लाख की लागत से नगरा ब्लॉक के मलप हरसेनपुर व बेरुआरबारी ब्लॉक के सुखपुरा गांव में प्लास्टिक कचरा निस्तारण केंद्र निर्माण को धनराशि भी जारी कर दी गई है और कार्य शुरू हो चुका है। इन दो गांवों में इसके निर्माण से कई गांवों को लाभ मिलेगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण से गांवों को बचाने की कवायद जारी है। इसके लिए प्लास्टिक कचरे का निस्तारण अब पंचायत स्तर पर करने का कार्य शुरू हो चुका है। यूनिट के निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत को दी गई है। इस यूनिट पर आसपास के गांवों के प्लास्टिक कचरे को मंगाकर उसकी प्रोसेसिंग करने की व्यवस्था होगी। पंचायत स्तर पर प्लास्टिक एकत्र करने के लिए जो संग्रहण केंद्र बने हैं वहां से कचरे को प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट पर लाया जाएगा।
इसमें प्लास्टिक बोतल के अलावा ड्राई फूड के रैपर आदि होंगे, जिसे लोग संग्रहण केंद्रों में रखेंगे। प्रोसेसिंग से तैयार सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण कार्य में करने के लिए सड़क बनाने वाली एजेंसियों को बिक्री की जाएगी। पूर्व में स्वीकृत प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट बेरुआरबारी ब्लॉक के सुखपुरा गांव में स्थापित करने का कार्य चल रहा है। यहां अब मशीन लगाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा दूसरी यूनिट नगरा ब्लॉक के मलप हरसेनपुर गांव में स्थापित करने के लिए भी कवायद तेज हो गई है। दोनों ग्राम पंचायतों को पूर्व में ही 16-16 लाख की धनराशि जारी की चुकी है।
बेची जाएगी प्लास्टिक डस्ट, ग्राम पंचायत को होगी आय
प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट में प्लास्टिक को अलग-अलग तरीके से प्रोसेस करने के लिए तीन तरह की मशीनें लगेंगी। इसमें बेलिंग मशीन, डस्ट रिमूवर और कटर मशीन होगा। हार्ड प्लास्टिक को बेलिंग मशीन से कंप्रेस किया जाएगा। डस्ट रिमूवर से गंदगी बाहर निकालने की व्यवस्था होगी। कटर मशीन से सिंगल यूज प्लास्टिक को छोटे टुकड़े में काटा जाएगा जो डस्ट रूप में होगा। यूनिट से निकलने वाले प्लास्टिक डस्ट की बिक्री सड़क निर्माण करने वाले एजेंसी को की जाएगी, जिससे ग्राम पंचायत को आय भी होगा। प्लास्टिक को तारकोल में मिलाकर सड़कें बनाई जाएंगी, जो पहले से अधिक मजबूत होंगी और उनमें पानी रोकने की क्षमता अधिक होगी।
पर्यावरण सुधार के साथ रोजगार भी मिलेगा
प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर संकट बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार प्रदूषण में सबसे अधिक हिस्सेदारी प्लास्टिक कचरा की है। दस फीसदी प्लास्टिक कचरा ही री-साइकिल होता है जबकि 90 फीसदी कचरा पर्यावरण के लिए नुकसानदेह साबित होता है। इस यूनिट से ग्रामीणों को रोजगार भी मुहैया कराया जाएगा।
सुखपुरा व मलप हरसेनपुर गांव में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट का निर्माण चल रहा है। सुखपुरा में अब मशीन लगाने की तैयारी चल रही है जबकि मलप हरसेनपुर में अभी निर्माण कार्य चल रहा है। इसके निर्माण से आसपास के गांवों को भी लाभ मिलेगा। - एसके ओझा, जिला सलाहकार, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया