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पीपीपी मॉडल पर होगा पीएचसी का संचालन

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बलिया। जनपद में एक पीएचसी का संचालन पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से इसका चिह्निकरण कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिह्निीकरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। योजना के तहत स्ट्रक्चर स्वास्थ्य विभाग का होगा। तय की गई संस्था अपने मानव संसाधन से इसका संचालन करेंगी।
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अभी तक जनपद में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कालेज की स्थापना की बात चल रही थी। अब शासन की ओर से जनपद में एक पीएचसी का संचालन भी पीपीपी मॉडल पर कराने का निर्णय लिया गया। यानी स्वास्थ्य सेवाएं भी अब प्राइवेट हाथों में जाने को तैयार हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का चयन कर इसका प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि अभी ये योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है। इसमें हमें सिर्फ पीएचसी का प्रस्ताव शासन को भेजना है। अस्पताल का संचालन करने वाली संस्था इसमें अपने चिकित्सक, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन और बार्ड ब्वॉय आदि रखकर इसका संचालन करेगी।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
बलिया। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को गंभीर मरीजों के इलाज के लिए हायर सेंटरों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में शासन की ओर से इस कमी को देखते हुए यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। जनपद में कुल 18 सीएचसी, 13 पीएचसी और 66 न्यू पीएचसी है। इनके संचालन के लिए 205 चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। जनपद में इस समय कुल 105 चिकित्सकों की ही तैनाती है। इसमें 20 से 30 चिकित्सक अवकाश, पढ़ाई आदि के लिए बाहर रहते हैं। 70-80 चिकित्सक ही नियमित रूप से सेवा देते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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चिकित्सकों की कमी से नहीं हो रहा अस्पतालों का संचालन
बलिया। चिकित्सकों की घोर कमी के कारण जनपद में कई अस्पताल बंद पड़े हैं। जिले में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नए बने हैं या बन रहे हैं। इसमें फेफना, बसंतपुर व मनियर सीएचसी को कार्यदायी संस्था द्वारा हैंडओवर कर दिया गया है। वहीं, रतसर, चिलकहर, बेरुआरबारी (सुखपुरा), चितबड़ागांव, सहतवार सीएचसी निर्माणाधीन है। जिले में कुल 13 पीएचसी है, जबकि न्यू पीएचसी 66 हैं। 12 नए भवनों पर निर्माण कार्य चल रहा है तो कुछ का अंतिम पड़ाव पर है। इसमें से सात पीएचसी शिवपुर दीयर गंगापार, सोहाव, जवहीं गंगापार, नगपुरा, कोटवारी, भीमपुरा नंबर-दो, मेड़वाकला पीएचसी को हैंडओवर कर दिया गया। इंदरपुर व खरौनी को अभी स्थानांतरित नहीं किया गया है। चिकित्सकों के अभाव में पिछले दिनों चालू हुई पीएचसी रिंगवन फिर बंद हो चुकी है। कुछ स्थानों पर फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन काम चला रहे हैं।
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