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Ballia News: मुआवजे के लिए अड़े लोग

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चौकिया मोड़। मऊ जिला जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले उभांव थाना क्षेत्र के खैराखास गांव निवासी मुकेश यादव का शव सोमवार को गांव लाया गया। लेकिन ग्रामीणों और परिजनों का विरोध जारी रहा। शव लेने से इन्कार कर दिया। युवक के आश्रितों के लिए मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। एडीएम डीपी सिंह और एएसपी अनिल कुमार झा के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला उन्हें मानने की कोशिश में जुटा रहा। घंटों बाद उन्हें किसी तरीके से सफलता मिली। इस दौरान माहौल को देखते हुए कई थानों की फोर्स के साथ पीएसी बुला ली गई।
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काफी मान मनौव्वल के बाद खैराखास गांव निवासी शोभा पुत्री तूफानी ने पांच सूत्री मांग प्रशासन के समक्ष रखी। कहा कि दोनों के बालिग होने के बाद भी इतनी गंभीर धाराओं में कैसे मुकदमा दर्ज किया गया, इसकी जांच की जाए। मऊ जिले की जेल में हुई मौत पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। कहा कि युवक के पोस्टमार्टम और शव लेने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से परिजनों पर जोर जबरदस्ती की जा रही है। उभांव पुलिस ने परिजनों की गैर मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया, जो न्याय संगत नहीं है। पीड़िता के लिए सरकारी आवास, दो एकड़ जमीन व 25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। एडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन की प्रावधानों के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सीओ फहीम, उभांव एसएसओ विपीन सिंह आदि मौजूद थे।
परिजनों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल : परिजनों का आरोप था कि जिस लड़के के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में मुकेश को जेल भेजा गया, वह लड़की बालिग है। दोनों ने मंदिर में शादी की थी। युवती उसकी पत्नी बनकर उसी के घर में रह रही है। मुकेश से शादी करने वाली लड़की का भी कहना है कि वह बालिग है। एक निजी काॅलेज से इंटरमीडिएट पास है। उसकी उम्र 23 वर्ष है। मुकेश यादव के साथ उसने मंदिर में शादी की है। पिता और भाई शादी के लिए राजी नहीं हुए। मुकेश पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। उभांव पुलिस ने मुकेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मुकेश को गिरफ्तार करने के बाद पहले बलिया जेल और फिर वहां से मऊ जेल स्थानांतरित किया गया था। कहा कि जब वह बालिग है तो एफआईआर कैसे दर्ज की गई।
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घर का इकलौता चिराग था मुकेश : मुकेश अपने परिवार का इकलौता पुत्र था। मां की भी मौत हो चुकी है। पिता तेजू यादव उसकी मौत से सदमे में हैं। उनका कहना था कि किसके सहारे अपनी जिंदगी गुजर बसर करूंगा। आगे के समय में मेरा मददगार कौन होगा। पत्नी के बाद इकलौते बेटे ने भी साथ छोड़ दिया। खैरा घाट पर उसकी चिता को मुखाग्नि उसके पिता तेजू यादव ने दी। उस समय भी उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। चिता में आग लगने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
पुलिस छावनी में तब्दील रहा खैराखास गांव : घटना के बाद से खैराखास में पुलिस समेत अधिकारियों का आना आने का सिलसिला जारी रहा। काफी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात किए गए थे।
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