विकास सोहांव के बसंतपुर उत्तरी ग्राम पंचायत में मुर्दों के नाम मनरेगा मजदूरी का भुगतान करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम ने मामले की जांच कराई। जांच में मामला सही पाए जाने पर गांव में तैनात ग्राम विकास अधिकारी को डीडीओ ने निलंबित कर दिया। मंगलवार को मामले में ग्रामीण फिर जिलाधिकारी के पास पहुंचे। आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों ने घपले के मुख्य आरोपियों को बचा लिया है।
ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड नं. 13) नथुनी पासवान ने बताया कि दो मृतकों के नाम मनरेगा से मजदूरी का फर्जी भुगतान करने की शिकायत की गई थी। साथ ही ग्राम प्रधान पर राज्य वित्त से प्राप्त धनराशि में घपलेबाजी का आरोप लगाया गया था। मृतकों को 32 दिन की मनरेगा मजदूरी का भुगतान तीन किश्तों में किया गया था। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा प्रधान और बीडीओ को बचाने के उद्देश्य से मात्र एक दिन के भुगतान पर हस्ताक्षर करने वाले ग्राम विकास अधिकारी आनंद को निलंबित कर दिया गया। 31 दिन के भुगतान पर हस्ताक्षर करने वाले सचिव, रोजगार सेवक, प्रधान, बीडीओ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मृतक प्रेमचंद पुत्र स्व. रुपचंद को तीन किस्तों में कुल 32 दिन का फर्जी भुगतान और मृतक दीनानाथ पुत्र ठग के नाम पर 20 दिन की फर्जी मजदूरी भुगतान किया गया है। इनकी मृत्यु लगभग चार वर्ष पूर्व हो चुकी है।
मामले की जांच के दौरान प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही प्रधान और रोजगार सेवक के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा गया है। बीडीओ पर लगे आरोपों की जांच के लिए तत्कालीन सीडीओ द्वारा जांच कमेटी बनाई गई है।
-डीएन पांडेय, प्रभारी डीसी मनरेगा।