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अब तक हुई महज 36 फीसदी बारिश, खरीफ की फसलों पर संकट

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बलिया। जिले में इस वर्ष सामान्य से 64 फीसदी कम यानी कुल 36 फीसदी ही बारिश हुई है। ऐसे में सूखे के हालात बन गए हैं। कम बारिश के कारण खरीफ की फसलों पर संकट है। उधर, मौसम की बेरुखी को देखते हुए कृषि विभाग भी अलर्ट हो गया है। किसानों को मौसम के अनुसार खेती करने का सुझाव दिया गया है। हालांकि आंकड़ों को देखें तो पिछले वर्ष बारिश की स्थिति बीते 10 वर्षों में सबसे अधिक रही है।
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वर्तमान में बारिश न होने से सूखा का असर खरीफ की खेती पर पड़ने लगा है। अधिकांश इलाकों में किसानों ने धान की रोपाई भी कम की है। करीब दो माह पहले दो दिन जोरदार बारिश हुई थी। इसके अलावा, बीते माह रुक-रुक बारिश होती रही। इसी बीच किसानों ने खरीफ के फसलों की बोआई इस उम्मीद के साथ की कि बारिश के बाद फसलें ठीक होंगी लेकिन बारिश की दगाबाजी के कारण जिन खेतों में बोआई हुई थी, वह फसलें भी तेज धूप और गर्मी के कारण सूखने लगी हैं। इस वर्ष जनवरी से मई तक कोई बारिश नहीं हुई है और जून से लेकर अब तक मात्र 173.80 मिमी बारिश हुई है। जबकि सामान्य वर्षा 481.3 मिमी है। जिला कृषि अधिकारी की माने तो सामान्य से 64 फीसदी कम बारिश हुई है। ऐसे में किसानों को परंपरागत खेती के पैटर्न में बदलाव करना होगा। बताया कि किसान तोरिया की फसल की बोआई कर सकते हैं। इसमें केवल एक बार सिंचाई की जरूरत होगी। इसके बाद किसान गेहूं की भी बोआई कर सकते हैं।
शासन को भेजी गई रिपोर्ट
बलिया। बारिश न होने से सूखे के हालात को देखते हुए कृषि विभाग ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी है। इसमें बताया गया है कि बारिश काफी कम होने के कारण जिले में खरीफ के 20 फीसदी रकबे में आच्छादन नहीं हो सका है। इसके अलावा, जो फसलें खेतों में हैं वह भी बारिश के अभाव में प्रभावित हो रही हैं।
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10 वर्षों में बारिश की स्थिति
वर्ष बारिश मिमी में
2013 278.51
2014 226.65
2015 439.03
2016 317.63
2017 296.36
2018 184.83
2019 257.03
2020 344.20
2021 770.23
2022 173.80
इस वर्ष बारिश काफी कम हुई है। शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। मौसम को देखते हुए किसानों को खेती में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है। किसान कम सिंचाई में तोरिया की खेती और इसके बाद गेहूं आदि की खेती कर सकते हैं। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बलिया
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