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सनातन को कमजोर मानने की भूल नहीं करनी चाहिए : संजय शुक्ला

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फेफना में आयोजित हिंदू सम्मेलन में उप​स्थित लोग।संवाद - फोटो : मछरेहटा में बोरवेल में गिरकर हिरन की मौत।
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फेफना। हिन्दू सम्मेलन समिति फेफना मंडल की ओर से शुक्रवार को हिंदू सम्मेलन जूनियर हाईस्कूल फेफना के परिसर में हुआ। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरी, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी से सीमा, संत समाज से जय रामदास महाराज, अध्यक्ष राधेश्याम वर्मा ने शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि सनातन की चिर पुरातन परंपरा है। वह कभी भी किसी पर आघात करने की परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सनातन का मूल स्वभाव सह-अस्तित्व, समन्वय और सर्वकल्याण का रहा है। सनातन की इस उदारता और सहिष्णुता को उसकी कमजोरी समझने का दुस्साहस नहीं किया जाना चाहिए। सनातन किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन जो सनातन को छेड़ता है, सनातन उसे छोड़ता भी नहीं है। यही नूतन सनातन है। सनातन को कमजोर मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। सनातन अहिंसा का पुजारी अवश्य है, लेकिन कायरता उसका स्वभाव नहीं है। छत्रपति शिवाजी महाराज और अफजल खान का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि शिवाजी महाराज सिर्फ शांति की भाषा समझते, तो अफजल खान उन्हें मार देता। शिवाजी महाराज ने शांति से क्रांति का मार्ग चुना और धर्म व स्वराज्य की रक्षा के लिए अफजल खान का वध किया। यही सच्चा सनातन है। आज विश्व पर्यावरण संकट, सामाजिक विघटन, मानसिक तनाव से जूझ रहा है। इन सभी का समाधान सनातन के संतुलन, मर्यादा और आत्मबोध में निहित है। हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा, मानव का विश्वास जगेगा। महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरी ने कहा सनातन धर्म कोई पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की चिरंतन पद्धति है जो सृष्टि के आरंभ से मानवता को सत्य, अहिंसा, करुणा और समरसता का मार्ग दिखाता आया है। हिन्दू संस्कृति की जड़ें अत्यंत प्राचीन, गहन और वैज्ञानिक हैं। बहन सीमा ने बताया कि हिन्दू संस्कृति में नारी सिर्फ परिवार की धुरी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। डॉ. राधेश्याम वर्मा ने कहा कि हिन्दू सम्मेलन सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक सार्थक प्रयास है। अभिषेक, डॉ. राजेंद्र पांडेय, अरुण मनी, सोनू सर्राफ, आदित्य सिंह, भानु, सुधीर, अंश आदि मौजूद थे।
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