बलिया। जिले में निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए अब निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकेंगे। पहली बार सरकार की ओर से निजी औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नीति बनाई गई है। इसमें प्रोत्साहन के साथ ही जिम्मेदारी भी तय की गई है। शासन ने उद्योग विभाग को इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-22 के तहत सरकार निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए प्रोत्साहन देने के साथ मरम्मत और रखरखाव करने की जिम्मेदारी तय करेगी। इससे जहां निवेशकों को नए उद्योग लगाने के लिए आसानी से जमीन उपलब्ध होगी। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र सही ढंग से स्थापित किए जा सकेंगे। साथ ही बिल्डर्स निवेशकों से मनमर्जी भी नहीं कर पाएंगे।
प्रोत्साहित करने एवं पूंजी निवेश को आकर्षित करने और अधिकाधिक रोजगार दिए जाने के लिए व्यापक स्तर पर नई एमएसएमई इकाइयों की स्थापना की जाएंगी। इसके साथ ही पूर्व से स्थापित इकाइयों के विस्तारीकरण और विविधीकरण को प्रोत्साहित करने एवं नीति के अंतर्गत अनुमन्य अन्य वित्तीय प्रोत्साहनों तथा निजी क्षेत्र में विकासकर्ता की ओर से 10 एकड़ अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल के औद्योगिक एमएसएमई पार्क व फ्लैटेड फैक्ट्री कांप्लेक्स की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए है। इसके लिए सरकार ने स्टॉप ड्यूटी में 50 से 75 फीसद तक छूट देने की भी व्यवस्था दी है।
एससी-एसटी और महिला उद्यमियों को ब्याज में छूट
स्थापित होने वाले नए सूक्ष्म उद्योगों के लिए पूंजीगत ब्याज उपादान के तहत ऋण पर देय वार्षिक ब्याज पर 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। यह ब्याज उपादान पांच वर्षों के लिए दिया जाएगा और अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये प्रति इकाई होगी। एससी-एसटी और महिला उद्यमियों के लिए यह ब्याज उपादान 60 प्रतिशत तक होगा।
जिले में इंडस्ट्री क्षेत्र बनाने के लिए भूमि नहीं है। उधर, शासन ने भूमि की समस्या से निजात पाने के लिए अब निजी भूमि पर भी इंडस्ट्री बनाने का निर्देश दिया है। इस पर सरकार स्टॉप ड्यूटी में छूट देने की भी व्यवस्था दी है। इस योजना से जिले में उद्योग-धंधों को संजीवनी मिलेगी लेकिन जरूरी है कि औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने वाले व्यक्ति के पास कम से कम 10 एकड़ भूमि हो। - एसके सिंह, उपायुक्त उद्योग