बलिया। लापरवाही के साथ नगर पालिका स्वच्छता की जंग लड़ने को तैयार है। हालात ये हैं कि रोजाना निकलाने वाले कूड़ा के निस्तारण की व्यवस्था पालिका के पास नहीं है और वह स्वच्छता रैंकिंग में स्थान हासिल करने की चाह है। नगर के 25 वार्डों में रहने वाले लोगों के घरों से रोजाना करीब 50 टन कूड़ा निकलता है। कस्बे में साफ सफाई व्यवस्था के लिए 420 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसमें आर्यन ग्रुप के 237 सफाई कर्मी भी शामिल हैं। जिन पर 11 वार्ड की सफाई के एवज में नगर पालिका करीब 22 से 25 लाख रुपये प्रति माह व्यय करती है। जबकि नगर के 25 वार्ड की साफ सफाई पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से प्रतिमाह करीब 50 से 55 लाख रुपए व्यय किए जाते हैं। नगर पालिका की लापरवाही के चलते बसंतपुर में बना कूड़ा निस्तारण केंद्र अब तक शुरू नहीं हो पाया। इसे दो वर्ष पहले ही शुरू होना था। ऐसे में शहर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है और उसे वार्ड नंबर 11 स्थित महावीर घाट में सड़कों के किनारे फेंक दिया जाता है, जिससे निकलने वाली दुर्गंध राहगीरों समेत मोहल्ला वासियों के लिए परेशानी का सबब बनी रहती है। वार्ड के सभासद संजय यादव लुत्ती ने कई बार इसको लेकर विरोध भी जताया, लेकिन नगर पालिका और जिला प्रशासन के कानों के जूं तक नहीं रेंगी। कूड़ा निस्तारण केंद्र के अभाव में और सफाई कर्मियों को समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण अक्सर होने वाली हड़ताल के चलते शहर की सड़कों पर आए दिन कूड़ा पसरा रहता है, लेकिन नगर पालिका केवल कागजों में जागरूकता अभियान से ही स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी स्थिति सुधारने का प्रयास कर रही है।