बलिया। एनआईए लखनऊ की तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को सोहन सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी और एक लाख के इनामी नक्सली राजकुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए दो नक्सली ठिकानों पर छापा मारा। इस दौरान टीम ने उसके परिजनों से आवश्यक पूछताछ कर मौके से दो मोबाइल व दो सिम कब्जे में लिया। टीम जिले में घंटों जमी रही।
सदर कोतवाली के सहरसपाली गांव में दो नवंबर 2008 को सोहन सिंह की कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी। हत्याकांड के बाद खून से लिखे पर्चे फेंक कर नक्सलियों ने हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। इसकी खबर लगते ही प्रशासन में खलबली मच गई थी। जांच -पड़ताल के दौरान गांव के कई घरों से नक्सलियों के हथियार, वर्दी, बम सहित अन्य सामग्री मिली थी। हत्या में 18 लोग नामजद हुए थे। हत्यारोपियों के तार बिहार के नक्सली संगठन से जुड़े मिले। कई माह तक इसकी जांच चलती रही। जिले में यह पहली नक्सली घटना थी। पुलिस ने 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, जो अब विभिन्न जेलों में हैं।
हत्याकांड का मुख्य आरोपी राजकुमार वर्मा उसी समय से फरार है। पुलिस ने उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया है। 16 वर्ष से फरार मुख्य आरोपी राजकुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए एनआईए की टीम ने सहरसपाली में राजकुमार व संतोष वर्मा के घर पहुंची। संतोष की पत्नी से आवश्यक जानकारी ली। नक्सली परिजनों से बातचीत करते है या अन्य गतिविधियों की जानकारी करने के लिए दो मोबाइल फोन व सिम कार्ड जब्त किया। टीम ने मृतक सोहन सिंह के परिजनों से घटना की बाबत एक-एक बिंदू पर जानकारी ली। नक्सलियों की ओर से फेंके गए खून से सने पर्चे की छायाप्रति व अन्य जानकारी जुटाई। टीम सहरसपाली गांव में घंटों जमी रही। सुरक्षा को लेकर स्थानीय थाना की फोर्स तैनात रहे।
बेटे को नक्सली नहीं अधिकारी बनाउंगी
सोहन सिंह हत्याकांड के 18 नामजद आरोपियों में शामिल संतोष सिंह की पत्नी माया देवी ने बताया की बेटे को नक्सली नहीं, पढ़ा -लिखाकर अधिकारी व बड़ा आदमी बनाऊंगी। माया ने बताया की तीन बेटी व एक बेटा है। पति के जेल जाने के बाद मेहनत मजदूरी कर पालन पोषण कर रही हूं। घटना के बाबत रोते हुए बताया की जिस समय हत्या हुई थी, उस समय पति कहीं बाहर गए हुए थे। गांव आए तो पुलिस ने पकड़ लिया। उस मामले में पकड़े गए कई लोग अब घर छोड़कर दूसरी जगह रहते हैं। हमलोग गांव पर ही हैं। आज नहीं तो कल न्याय जरूर मिलेगा।