बलिया/पंदह। देवरिया के नवलपुर से बलिया के सिकंदरपुर तक एनएच 727बी के चौड़ीकरण और फोरलेन का कार्य मुआवजे के फेर में फंस गया है। बेल्थरारोड और सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र में महज 17 फीसदी किसानों को ही मुआवजा मिला है।
बीते फरवरी में ही अधिग्रहित जमीनों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। इसके मुताबिक उक्त दोनों तहसीलों के 34 गांवों के कुल 713 किसानों से 61.7850 हेक्टेयर जमीन के बदले 105 करोड़ मुआवजा दिया जाना है। छह माह बीतने के बाद भी मुआवजे के रूप में मात्र 18 करोड़ का ही वितरण हो पाया है। 45 किमी लंबी इस परियोजना को पूरा करने के लिए बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के दस गांवों के 302 काश्तकारों से 404 गाटा और सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के 24 गांवों के 411 किसानों से 550 गाटा जमीन अधिग्रहित की जानी है।
दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद इसकी गति काफी सुस्त हो गई है। सूत्रों का कहना है की इस परियोजना की सियासी मॉनिटरिंग शून्य होने से भी मुआवजा वितरण का कार्य धीमी गति से हो रहा है। इसकी वजह से कार्य शुरू होने में विलंब हो रहा है।
650 करोड़ रुपये होगा खर्च : एनएच 727बी को अमली जामा पहनाने में 650 करोड़ खर्च होंगे। देवरिया जनपद के नवलपुर से जिले के बेल्थरारोड तहसील के उभांव तक इसे फोरलेन और उसके बाद सिकंदरपुर तक टूलेन पेव्ड शोल्डर बनाने का प्रस्ताव है। इस क्रम में इसे 10 मीटर चौड़ा किया जाएगा। तकरीबन 26 किलोमीटर लंबा यह राष्ट्रीय राजमार्ग अभी मात्र सात मीटर चौड़ा है। इसके अलावा भागलपुर में और करमौता-पंदह बाई पास भी बनाया जायेगा। जिसकी चौड़ाई करीब 45 मीटर होगी। वहीं तुर्तीपार पुल को भी फोर लेन करने का प्रस्ताव है। यानी यह पुल भी दो लेन चौड़ी की जाएगी। जबकि उभांव और धानी ढाला पर आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) भी बनाया जाएगा।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनीष चौहान ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जमीन का प्रपत्र मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। नवंबर तक भूमि संबंधित प्रपत्र मिलने की उम्मीद है। रही बात तुर्तीपार पुल की तो उसके निर्मित भाग को तकनीकी रूप से मजबूत भी करता जाएगा।