बलिया। शासन की ओर से बरसात से पहले संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। नाबार्ड से वित्तपोषित तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इसमें 5.71 करोड़ से सरयू नदी के दाएं तट पर निर्मित तुर्तीपार-श्रीनगरतट बंध के किमी 64 पर एक स्पर का निर्माण किया जाएगा। वहीं, 4.97 करोड़ से गंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित बलिया-बैरिया तटबंध (एनएच-31) के किमी 26.100 एवं 26.300 पर निर्मित स्पर का पुनरुद्धार तथा 1.72 करोड़ से सरयू नदी के दाएं तट पर स्थित डूहा-कथौड़ा विस्तार तटबंध के किमी 0.180 पर निर्मित स्पर का पुनरुद्धार किया जाएगा। बरसात के दिनों में जनपद में गंगा, सरयू और टोंस आदि नदियां उफान पर होती हैं। इन नदियों में आने वाली बाढ़ से लाखों की आबादी प्रभावित होती है। नदियों के किनारे बसे लोगों को जानमाल का नुकसान उठान पड़ता है। सैकड़ों एकड़ उपजाउ जमीन और फसल को नदिया कटान क अपने आगोश में ले लेती हैं। बाढ़ से होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए बाढ़ विभाग की ओर से कई प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। इसे शासन से स्वीकृति मिलनी शुरू हो गई है। नाबार्ड से वित्तपोषित योजना के तहत तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इसमें 5.71 करोड़ की लागत से सरयू नदी के दाएं तट पर निर्मित तुर्तीपार-श्रीनगरतटबंध के किमी 64 पर एक स्पर का निर्माण किया जाएगा। पहली किस्त में 2.85 करोड़़ की धनराशि भी जारी कर दी गई है। इसके सात ही 4.97 करोड़ की लागत से गंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित बलिया-बैरिया तटबंध (एनएच-31) के किमी 26.100 एवं 26.300 पर निर्मित स्पर का पुनरुद्धार किया जाएगा। पिछली बार बाढ़ में इन स्परों को काफी नुकसान पहुंचा था। पहली किस्त में 2.48 करोड़ जारी किए गए हैं। इसके साथ ही 1.72 करोड़ की लागत से सरयू नदी के दाएं तट पर स्थित डूहा-कथौड़ा विस्तार तटबंध के किमी 0.180 पर निर्मित स्पर का पुनरुद्धार किया जाएगा। पहली किस्त में 86.15 लाख की धनराशि दी गई है।
वापस करना पड़ सकता है धन
रामगढ़। एनएच-31 पर गंगा के मुहाने पर बसे गांवों को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ विभाग नई परियोजनाओं के साथ ही गत वर्षों पहले छतिग्रस्त हुए करोड़ों रुपए से बने के स्परों की मरम्मत भी कराने की सोच रहा है। शासन से हरी झंडी मिल गई है। हालांकि मार्च महीने में वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ये धन वापस भी करना पर सकता है। एक दशक में गंगापुर डगरा से लेकर दुबे छपरा तक करीब आधा दर्जन ठोकरों का निर्माण कराया गया है। मानक के अनुरूप कार्य न होने के कारण यह ठोकर हर साल गंगा की लहरों के सामने बौना साबित होते हैं। गंगा की लहरे हर साल किसी न किसी ठोकरों को अपना शिकार बना लेती है। सितंबर माह में गंगा की लहरों ने स्पर संख्या 27.500 पर धावा बोल दिया था। इसके कारण ठोकर का अगला हिस्सा कटकर गंगा की लहरों में बह गया। स्पर संख्या 27.500 से लेकर 27.900 के मध्य रिवेटममेट के कार्य को भी अपना निवाला बना दिया था। बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र ने बताया कि जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।