सुखपुरा। हिंदी भाषा राष्ट्रीयता की प्रतीक भाषा है। हिंदी को दबाने की नहीं, उपर उठाने की आवश्यकता है। राजनीतिक स्वार्थो के कारण आज हिंदी भाषा को वह स्थान प्राप्त नहीं है, जो उसे होना चाहिए। दिन प्रतिदिन हिंदी की उपेक्षा इसी तरह होती रही तो अपने ही देश में हिंदी विलुप्तता के कगार पर पहुंच जाएगी। यह बातें हिंदी के मशहूर लेखक एवं साहित्यकार डॉ जनार्दन राय ने कही। वह रविवार की शाम संत यतीनाथ लोक सांस्कृतिक संस्थान के तत्वावधान में आयोजित संत यतीनाथ मंदिर परिसर में हिंदी दिवस पखवारा पर आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कहा कि सच में हिंदी कामगारों तक सिमट कर रह गयी है। आजादी से अब तक तकरीबन सभी हुकूमतों ने हिंदी के साथ अन्याय किया है। सरकारों ने पहले हिंदी को राष्ट्रभाषा माना, फिर राजभाषा का दर्जा दिया और अब इसे संपर्क भाषा भी नहीं रहने दिया है। हिंदी को बचाने व राष्ट्रभाषा बनाने के लिए जन आंदोलन की जरूरत है। आधुनिक तकनीकी संसाधनों में हिंदी वर्णमाला की आवश्यकता विषय को रेखांकित करते हुए पूर्व प्रधानाचार्य डॉ अखिलेश सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इसकी पहल करने की जरूरत है। संसाधनों में हिंदी अत्यंत आवश्यक हो गई है। संसाधनों के निर्माता अंग्रेजी के साथ हिंदी वर्णमाला भी अपने संसाधनों में लोडकर बाजार में उतारें। इसकेअलावा गोष्ठी को अरुण कुमार सिंह, कैलाशी बेचू राम, रमाशंकर यादव,र ाजेश्वर सिंह, सुभाष आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर राज नारायण यादव, राजविजय यादव, तेजन सिंह, राजेंद्र सिंह गंवार, बलराम यादव, संजय राजभर, गोवर्धन भोजपुरी, कन्हैया यादव के रचनाओं को खूब सराहा गया। स्वागत जितेंद्र सिंह व संचालन हरेराम सिंह ने किया। अध्यक्षता श्याम बहादुर सिंह ने किया। आयोजक बृज मोहन प्रसाद अनारी ने आभार व्यक्त किया।