रतसर क्षेत्र स्थित सुखी पड़ी सिकरिया मुख्य नहर।
- फोटो : BALLIA
बलिया। जिले में नहरों का बुरा हाल है। सिंचाई के किसान परेशान हैं लेकिन न सफाई हुई, न ही नहर में पानी का अता-पता है। उधर, खेतों में गेहूं अंकुरित होकर इस ऊंचाई तक पहुंच गया है, जब उसे पानी की अत्यधिक आवश्यकता है। ऐसे में नहरों में पानी न होने से किसान खेतों की सिंचाई को लेकर परेशान हैं। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम नहरों का हाल जानने के लिए निकली तो न नहरों में साफ-सफाई दिखी और न ही पानी। हद तो यह है कि कुछ नहरों में गोबर के कंडे (उपले) भी बनते और सूखते मिले। जिले में नहरों से कुल 15 लाख आठ हजार 343 हेक्टेअर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किलोमीटर लंबी नहर, रजवाहा और माइनरों का जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किलोमीटर लंबी है। इस नहर के चार रजवाहा और 50 माइनर हैं। इनकी कुल लंबाई 65.186 किलोमीटर है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा, सुरहा ताल पंप नहर स्थापित है। इसके मुख्य नहर की लंबाई जहां 11.8 किलोमीटर है। वहीं नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लंबाई छह किलोमीटर है। हालांकि यह पंप नहर सालों से साफ-सफाई के अभाव में बंद है। इसी तरह जिले में लघु डाल की 59.95 किलोमीटर लंबी सात नहरें हैं। इनके कुल 18 टेल निर्धारित किए गए हैं। शारदा सहायक प्रणाली की भी 70 किलोमीटर लंबी दो नहरें हैं। इन नहरों से सिंचाई के एवज में विभाग को हर साल करीब पांच करोड़ के राजस्व की प्राप्ति होती है। इसके बावजूद किसानों को समय से पानी नहीं मिल पाता।