बलिया। चैत्र नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में रीति-रिवाज व परंपरा के अनुरूप मां शैलपुत्री स्वरुप का पूजन-अर्चन किया गया। श्रद्धालुदूर-दराज से मंदिरों में पहुंच कर मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करते रहे। महिला श्रद्धालुओं की भीड़ खास तौर पर मंदिरों में देखने को मिली। लोग भक्ति भाव में जय मां दुर्गे का उद्घोष कर आशीर्वाद और मन्नत मांगते रहे।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का बहुत महत्व है। इस दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ भक्ति भाव में लीन होकर पूजा-अर्चना करते हैं। भोर से ही जिले के मां मंगला भवानी मंदिर, उचेड़ा स्थित मां भवानी मंदिर, शंकरपुर स्थित मां शांकरी भवानी मंदिर, ब्रम्हाइन स्थित मां ब्रम्हाणी देवी मंदिर, खरीद स्थित माता मंदिर, सिकन्दरपुर स्थित जल्पा-कल्पा देवी मंदिर, गायघाट स्थित मां पंचरूखा देवी, पंचदेवी मंदिर, कपूरी स्थित मां कपिलेश्वरी भवानी मंदिर, मां दुर्गा मंदिर, शोभनाथपुर स्थित मां भगवती मंदिर, दुर्जनपुर स्थित मां काली मंदिर, रेवती स्थित मां दुर्गा मंदिर, काली माता मंदिर, बांसडीह स्थित मां दुर्गा मंदिर, सहतवार स्थित मां दुर्गा मंदिर सहित देवी मंदिरों में भक्तों का रेला शुरू हो गया।
बांसडीह कस्बा स्थित बड़ी बाजार दुर्गा मंदिर व कचहरी स्थित मां चक्रवर धारणी भवानी मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन बुधवार को सुबह से ही भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। मंदिर में मां का जयकारा लगाते हुए श्रद्धालुओं ने मां का पूजन-अर्चन कर मत्था टेका। मंदिर के पुजारी अशोक पांडेय ने बताया कि मां के भक्तों को किसी भी प्रकार का कोई दिक्कत न हो सके इसको लेकर विशेष बंदोबस्त किए गए हैं।
रसड़ा में चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन क्षेत्र के विभिन्न देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। क्षेत्र के उचेड़ा चंडी माई का मंदिर, रसड़ा स्थित काली जी मंदिर, नीबू कबीरपुर देवी मंदिर, अमहर स्थित दुर्गा मंदिर, डेहरी काली जी मंदिर, ब्रह्म स्थान दुर्गाजी मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों पर सुबह से ही महिला पुरुष श्रद्धालुओं भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में नारियल, चुनरी एवं प्रसाद चढ़ाने के साथ ही मत्था टेककर लोक मंगल की कामना की।
रेवती- लिया मुख्य मार्ग पर स्थित पचरुखा माता का मंदिर शक्तिपीठ के रूप में पूज्य है। देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के समय श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। पूरे नवरात्र देवी की आराधना पूजा विशेष रूप से नर नारी किया करते हैं। चैत्र नवमी की तिथि पर मंदिर के पास मेला लगता है। इस तिथि पर मेला परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देवी के दर्शन-पूजन को पहुंचती है। दुर्गा स्वरूपा माता के बारे में यह प्रसिद्ध है कि यहां जो भी मनौतियां की जाती हैं, देवी कृपा से वे पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि चैत्र के नवरात्र में दूर दूर से श्रद्धालु देवी दरबार में पहुंच कर देवी दर्शन के साथ विधिवत पूजन अर्चन करते हैं।