बलिया। भूलेख पोर्टल पर जिले के 50 से अधिक गांव बीते एक सप्ताह से प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। इसके कारण संबंधित गांवों के लोग परेशान हैं। ऑनलाइन खतौनी नहीं देख पाने के कारण किसानों को जानकारी के लिए तहसीलों में जाना पड़ रहा है।
शासन की ओर से किसानों की सुविधा के लिए भूलेख पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर किसान अपनी खतौनी को देख सकते हैं। इसके अलावा, कई कार्यों के लिए किसान पोर्टल से ही खतौनी निकाल कर अपना काम करते हैं लेकिन बीते एक सप्ताह से कई गांवों का नाम ही भूलेख पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
इसके चलते, जहां किसानों को परेशानी हो रही है। वहीं, विभिन्न विभागों और बैंकों में किसानों की खतौनी सत्यापन करने में भी दिक्कत हो रही है। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लॉक के भरौली गांव के किसानों की जमीन विजौरा खास और विजौरा गंगबरार मौजे में है। लेकिन इन दोनों राजस्व गांवों का नाम बीते एक सप्ताह से पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
बताया जाता है कि केवल सदर तहसील के ही 50 से अधिक गांवों का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इसके चलते किसानों को खतौनी के लिए तहसीलों का चक्कर काटना पड़ रहा है। भरौली के किसान सतीश कुमार, राकेश आदि ने बताया कि भूलेख पोर्टल पर कई राजस्व गांवों का नाम प्रदर्शित नहीं होने के कारण उन्हें बार-बार तहसील से खतौनी लेना पड़ रहा है।
ऐसे प्रदर्शित होते हैं खतौनी
भूलेख पोर्टल पर सबसे पहले जनपद चुनने का विकल्प होता है। इसके बाद तहसील और फिर राजस्व चुनने का विकल्प होता है। गांव के एक शब्द चुनते ही संबंधित तहसील के सभी चुने गए अक्षर वाले गांव प्रदर्शित होते हैं। लेकिन और शब्द के चुनने के बाद मात्र 13 गांव ही प्रदर्शित हो रहे हैं।