13 वर्ष बाद घर लौटने के बाद अपने पति को मिठाई खिलाती पत्नी सतिया देवी तथा खड़े ग्रामीण। संवाद
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बांसडीह रोड। थाना क्षेत्र के टघरौली गांव में शनिवार की रात 49 वर्षीय मोहन बिंद 13 वर्ष बाद अपने घर लौटा तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। घर सहित गांव में खुशियां छा गई। मोहन ने ग्रामीणों के साथ गांव के देवी-देवताओ के मंदिर में माथा टेका। पत्नी सीतिया देवी पति से लिपट कर सिसक पड़ी। परिजनों ने बताया कि, मोहन बिंद 2008 में घर से कमाने के लिए पठानकोट गया था। एक ढाबा (होटल) मालिक से उसकी मुलाकात हुई तो उसने 15 हजार रुपए प्रति माह वेतन पर उसे बर्तन आदि की साफ सफाई के लिए रख लिया। कुछ दिन जब उसने तनख्वाह मांगा तो ढाबा मालिक ने इंकार करते हुए उसे बंधक बना लिया। ऐसे ही 13 वर्ष बीत गए। एक दिन बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के सोनपुर कला निवासी आर्मी जवान रामजी सिंह और सतेद्र सिंह ढाबे पर चाय पीने पहुंचे। मोहन ने भोजपुरी में ‘अऊर का चाही, कुुछु अऊर लेबा’ कहा तो इसके बाद आर्मी जवान समझ गए कि यह बलिया का है। पूछे जाने पर मोहन ने आपबीती सुना दी। आर्मी जवान ने मोबाइल से युवक के घर उसकी ़फोटो भेजी तो परिजन उसे पहचान गए और ट्रेन से पठानकोट पहुंच गए। वहां से एसपी से मिलकर आर्मी जवानों ने ढाबा पर छापेमारी कराई और उसे परिजनो को सौंप दिया। जबकि ढाबा मालिक फरार हो गया। शनिवार की देर रात मोहन गांव पहुंचा। मोहन के तीन पुत्र व दो पुत्रियां हैं। परिजनों ने बताया कि मामले को लेकर जल्द ही वह बलिया डीएम और एसपी से मिलेंगे।