बलिया। क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के पदाधिकारियों ने सोमवार को नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता शुद्धिकरण के नाम पर किए जा रहे एसआईआर परीक्षण पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। संगठन का कहना है कि यह प्रक्रिया अंततः नागरिकता परीक्षण की दिशा में एक कदम है, जो भविष्य में मतदाताओं के लिए संकट पैदा कर सकती है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि एसआईआर प्रक्रिया एआरओ को अत्यधिक विवेकाधिकार देती है, जिससे किसी को भी संदिग्ध मानकर सूची से बाहर किया जा सकता है। संगठन ने असम के नागरिकता परीक्षण का उदाहरण देते हुए मांग की कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को ही नागरिकता का आधार माना जाए। साथ ही, मतदाता बनने के लिए पूर्व की भांति शपथ पत्र और स्व-घोषणा को मान्यता देने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने वालों में सत्यनारायण, चंद्रप्रकाश, शिवानंद, ज्ञानदेव सिंह और मनीष द्विवेदी प्रमुख रूप से शामिल रहे। संवाद