बलिया। ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) के मरीजों को अब और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके लिए शासन ने इलाज के प्रोटोकॉल में नई दवा शामिल की है। नए मरीजों के साथ ही पुराने मरीजों को भी यह दवा दी जाएगी। नेशनल कंट्रोल एड्स सोसाइटी की ओर से जिले के एआरटी सेंटरों पर यह दवा भेज दी गई है। जिला एचआईवी/एड्स एवं क्षय रोग अधिकारी डॉ. आनन्द कुमार ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देशों के तहत प्रोटोकॉल में नई दवा को शामिल किया गया है। यह दवा एचआईवी के वायरस पर अधिक तेज और असरकारक है। इससे शरीर में वायरस का असर कम होता है। जबकि दवा साइड इफेक्ट भी करेगी। अभी तक इलाज में जो दवाएं दी जाती थी, उनमें से अब एक दवा को हटा दिया गया है। डॉ. कुमार ने बताया कि एड्स के मरीजों के लिए प्रोटोकॉल में शामिल नई दवा की सबसे बड़ी खूबी ये है कि किसी भी समय इसका सेवन किया जा सकता है। हटाई गई दवा के लिए समय रात को सोने से पहले निर्धारित था। इसकी वजह से कई बार मरीज दवा खाना भूल जाते थे और ड्रग रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ जाती थी। इस दवा के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे थे। इसमें मरीजों में घबराहट, नींद न आना, गफलत में रहना जैसे लक्षण बने रहते थे। इन परिणामों को देखते हुए प्रोटोकॉल में नई दवा को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि एड्स को लेकर लोगों में जागरूकता कम है। सही समय पर इलाज करवाकर वायरस को शरीर में बढ़ने से रोका जा सकता है।