बलिया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जिले में मजाक बन कर रह गई है। फसल बीमा एजेंसी की लापरवाही कहें या बैंकों की मनमानी। किसान के खेतों में मसूर की फसल बोई गई है जबकि केसीसी धारक किसानों से गेहूं फसल के लिए बीमा की प्रीमियम कटौती की गई है। इतना ही नहीं फसल बीमा योजना स्वैच्छिक होने के कारण जिन किसानों ने बैंकों को कोई सूचना नहीं दी, इसके बावजूद उनकी फसल बीमा के प्रीमियम की कटौती नहीं की गई है। यह राज फसलों की क्षति का जायजा लेने गई टीम की जांच में हुआ। ऐसे में वह किसान परेशान हैं जिनकी फसल हवा व बारिश से नुकसान हो गई है।
दौलतपुर गांव के ही 96 किसानों की मनमानी कटौती
सोहांव ब्लॉक के दौलतपुर गांव के 98 किसानों ने खरीफ व रबी फसल के लिए फसल बीमा कराया है। इन किसानों ने दौलतपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक से केसीसी कराया है। इस बार मसूर की खेती हवा व बारिश से काफी प्रभावित हुई है। किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें फसल बीमा योजना से राहत मिलेगी। लेकिन पड़ताल में सामने आया कि 96 किसानों के केसीसी खाते से गेहूं फसल के सापेक्ष प्रीमियम की कटौती की गई है। दौलतपुर गांव निवासी किसान संतोष सिंह, डॉ. हरिवंश सिंह, मुसाफिर सिंह आदि ने बताया कि बैंकों व फसल बीमा एजेंसी की लापरवाही व मनमानी के कारण अब गांव के किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
बैंक ने नहीं काटी प्रीमियम
रसड़ा क्षेत्र के कोटवारी गांव निवासी किसान विनोद प्रताप सिंह ने फसल बीमा कराया है। इनके खेतों में गेहूं की शानदार फसल लगी थी। लेकिन हवा व बारिश से इनकी दो एकड़ की फसल बर्बाद हो गई। कृषि विभाग को इसकी जानकारी दी। जब मौके पर जांच टीम पहुंची और फसल देखने के बाद पड़ताल की तो पता चला कि इनके खाते से प्रीमियम की कटौती नहीं की गई है।
दौलतपुर व रसड़ा क्षेत्र का मामला जांच के दौरान सामने आया है। इन मामलों में संबंधित बैंकों की लापरवाही है। किसानों को भी बैंकों में जाकर फसलों की जानकारी देनी चाहिए थी। इन किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाएगा। - नितेश कुमार, जिला प्रबंधक, भारतीय कृषि बीमा कंपनी, बलिया।
इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। किसानों की ओर से शिकायत मिलने पर जांच कर पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।- पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी, बलिया।