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Ballia News: गांव तो छोड़िए जनाब...नगरों में भी नहीं मिल पा रहा शुद्ध पानी

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बलिया। जिले में गांव तो छोड़िए नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं है। नगरीय क्षेत्रों में वर्षों पुरानी परियोजनाओं से ही पेयजल आपूर्ति हो रही है। कई नई काॅलोनियां विकसित हो चुकी हैं, लेकिन इन परियोजनाओं का पुनर्गठन अभी तक नहीं हुआ। इस कारण अधिसंख्य जनसंख्या अभी शुद्ध पेयजल से कोसों दूर है।
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60695 एमएलडी पेयजल प्रतिदिन के हिसाब से आवश्यकता है। उपलब्ध संसाधनों से 3060 एमएलडी प्रतिदिन के हिसाब से पेयजल सप्लाई हो रही है। 58299 घरों में तो पेयजल कनेक्शन ही नहीं है।

शासन की योजना हर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की है। इसके लिए परियोजनाएं भी स्वीकृत की जा रही हैं। परियोजना की धीमी गति या अधिकारियों की लापरवाही से नगरीय क्षेत्र की अधिसंख्य आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित है। वर्षों पुरानी पेयजल परियोजनाएं विस्तारित हो रहे नगरों में सभी घरों तक पेयजल पहुंचाने में नाकाफी हैं। नवगठित नगर पंचायतों की हालत तो और खराब है। नगरा में पहले से निर्मित पेयजल परियोजना है तो चालू ही नहीं हैं। इसे चालू करने के लिए भी विभागों की ओर से सक्रियता नहीं बरती जा रही है। रतसर कला में कोई पेयजल परियोजना है ही नहीं।
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शासन की ओर से अमृत-2 योजना के तहत पेयजल एवं जलोत्सारण के कार्यों के लिए जल निगम नगरीय को कार्यदायी संस्था बनाया है। कार्यदायी संस्था बनने के बाद जल निगम की ओर से जनपद के कुल 12 निकायों में वाटर सप्लाई और सीवरेज व्यवस्था के लिए सर्वे कराया गया। सर्वे के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उक्त निकायों में जनसंख्या 359677 थी जो वर्तमान में 449596 हो चुकी है। उक्त निकायों में पेयजल आपूर्ति के लिए अभी तक 15745 घरों में कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि जनसंख्या के अनुसार वर्तमान में 58299 घरों में पेयजल कनेक्शन की आवश्यकता है। अभी तक 3060 एमएलडी प्रतिदिन के हिसाब से पेयजल आपूर्ति हो रही है, जबकि 60695 एमएलडी प्रतिदिन आवश्यकता है। पेयजल तो लोगों को पूरा नहीं मिल रहा है, लेकिन टैक्स सभी पर लगाया जा रहा है। इसी के हिसाब से स्टोरेज और पाइपलाइन की भी आवश्यकता है।

अपने संसाधनों पर निर्भर हैं लोग

बलिया। पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं होने से लोग पेयजल की आपूर्ति के लिए अपने संसाधनों पर निर्भर हैं। हैंडपंप, सबमर्सिबल आदि से पेयजल की आपूर्ति करते हैं। इससे भूजल का दोहन भी अधिक होता है।

सिर्फ बांसडीह और बेल्थरारोड के लिए स्वीकृत हुई परियोजना

बलिया। शासन की ओर से हाल ही में जारी की गई अमृत-2 की गाइड लाइन के अनुसार पेयजल कनेक्शन से वंचित लोगों का सर्वे जल निगम शहरी की ओर से किया गया है। अब इसके आधार पर पेयजल सप्लाई प्लान बनाया जाएगा और इसकी डीपीआर तैयारी की जाएगी। स्वीकृति के बाद इस पर कार्य शुरू कराया जाएगा। सर्वे के बाद जल निगम शहरी से सिर्फ बांसडीह और बेल्थरारोड के लिए परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। बांसडीह में 28.14 करोड़ से 1600 केएलडी की एक टंकी बनाई जाएगी और 55.7 किमी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही 1250 केएलडी की पुरानी टंकी की मरम्मत होगी। बेल्थरारोड में 27.03 करोड़ की परियोजना स्वीकृत हुई है। इसमें 1200 केएलडी की टंकी के साथ 51.85 किमी का लाइन विस्तार होगा। 135 केएलडी की पुरानी टंकी की मरम्मत होगी।

बलिया के लिए चाहिए दो हेक्टेयर भूमि

बलिया। नगर पालिका बलिया के लिए सरफेस वाटर प्रोजेक्ट की तैयारी है। इसमें गंगा नदी से पानी लिफ्ट और ट्रीट कर सप्लाई करने की योजना है। इसके लिए गंगा के किनारे दो हेक्टेयर भूमि चाहिए। अभी तक भूमि नहीं मिली है। डीपीआर तैयार की जा रही है। बैरिया के लिए भी डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा गया है।
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कहां कितने पानी की आवश्यकता

निकाय पानी (केएलडी) कनेक्शन

बलिया 17621 16700

रसड़ा 5360 5950

चितबड़ागांव 3692 3137

सहतवार 3478 3388

बांसडीह 3577 3000

रेवती 4448 3868

मनियर 3356 3673

बेल्थरारोड 3443 3420

सिकंदरपुर 4047 3566

बैरिया 4791 4390

नगरा 3468 4105

रतसर 3409 3100

कुल 60695 58299

बांसडीह और बेल्थरारोड के लिए परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। बलिया और बैरिया के लिए डीपीआर लगभग तैयार है। अन्य निकायों के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

- गुलाम अख्तर, एई, जल निगम शहरी
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