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मायके में सीखी हुनर, आज आ रहा काम

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बैरिया। कोरोना महामारी की लागू लॉक डाउन के बाद देश के विभिन्न प्रान्तों से प्रवासी अपने गांव आ तो गए हैं। लेकिन उनके सामने घर का खर्च चलाना समस्या बन गया है। मुम्बई, गुजरात, दिल्ली में आज भी कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने से प्रवासी मजदूर पुन: उन शहरों में जाने से डर रहे हैं। ऐसे में प्रवासी मजदूरों की पत्नियां अपनी हुनर के दम पर घर तो किसी तरह चला रही हैं। लेकिन कहती हैं कि कोरोना का प्रभाव समाप्त होने के बाद मजबूरी में शहर तो जाना ही पड़ेगा। नहीं जाने से बच्चों की पढ़ाई रुक जाएगी। दुर्जनपुर निवासिनी किरन देवी पत्नी जितेंद्र वर्मा बताती हैं कि घर चलाने के लिए पैसों की तो खूब जरूरत है लेकिन शहर जाने लायक अभी हालात नहीं है। गैर प्रान्त में कोरोना आज भी फैल रहा है जिससे वहां जाने में डर लग रहा है। ऐसे में मेरे द्वारा घर पर ही सिलाई का कारोबार शुरू किया गया है, जिससे घर का खर्च निकल जा रहा है। कहा कि की हुनर हाथ में है तो कहीं भी मेहनत के बल पर महिलाएं भी घर चला सकती हैं। दुर्जनपुर गांव की रहने वाली रेखा देवी पत्नी आनन्द कुशवाहा कहती हैं कि गांव छोड़कर पैसे कमाने के लिए लोग जाते हैं। आज स्थिति यह है कि शहर से भागना पड़ रहा है। ऐसे में पढ़ाई के साथ साथ हाथों की कुछ कला भी सीखना लड़कियों के लिए जरूरी है। मायके में सिलाई का हुनर सीखना आज काम आ रहा है। घर के परिजनों के सहयोग से सिलाई का काम कर रही हूं। इससे होने वाली कमाई से ही इन दिनों घर का खर्च चल रहा है।
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