बलिया। जयप्रकाश नारायण पक्षी अभ्यारण्य (सुरहाताल) के ईको सेंसेटिव जोन के चिह्नांकन और एक किमी के दायरे से अतिक्रणण हटाने के लिए एनजीटी की ओर से एक माह की समय सीमा निर्धारित करने के बाद काशी वन्य जीव अभ्यारण्य की टीम शुक्रवार को जनपद पहुंचेगी। इस दौरान उक्त मुद्दों पर मंथन के बाद प्रकरण में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की इमारतों का निर्माण सुरहाताल पक्षी बिहार के ईको सेंसेटिव जोन में पाए जाने पर एनजीटी ने मामले की सुनवाई करते हुए पिछले दिनों इसके आगे निर्माण पर फिलहाल रोक लगा दी थी। विवि के रजिस्ट्रार के निर्देशित किया था कि आगे कोई निर्माण न कराएं। एनजीटी ने जिलाधिकारी एवं एसपी बलिया एवं वन मंडल पदाधिकारी काशी वन्य जीव खंड रामनगर को निर्देशित किया था कि एक माह के भीतर ईको सेंसिटिव जोन क्षेत्र का सीमांकन कराएं। अतिक्रमण चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने के लिए उचित कार्रवाई करें। उक्त स्थान पर साइन बोर्ड लगवाने का निर्देश दिया था। कहा था कि लोगों को बताएं कि यह निर्माण क्षेत्र नहीं है और उस पर आगे कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। एनजीटी के आदेश के बाद संबंधित विभागों की ओर से आगे की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि शुक्रवार को प्रकरण में काशी वन्य जीव अभ्यारण्य की टीम आने वाली है। इसके बाद आगे के लिए निर्णय लिया जाएगा।