बलिया। संरक्षित पक्षी बिहार में विश्वविद्यालय की इमारत के निर्माण के मामले में एनजीटी के निर्देश पर शासन की ओर से जांच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है। 29 दिसंबर को टीम मामले को लेकर विकास भवन में बैठक करेगी। एनजीटी ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए दो माह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश शासन को दिए हैं।
बसंतपुर में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के भवन का निर्माण पहले फेज में 92.39 करोड़ रुपये की धनराशि से किया जा रहा है। इसके लिए 35 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हो चुकी है। 15 करोड़ रुपये की पहली किस्त का प्रयोग किया जा चुका है और दूसरी किस्त से निर्माण कार्य चल रहा है।
पहले फेज में प्रशासनिक भवन, एकेडमिक भवन और लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के सरनी निवासी धर्मेंद्र सिंह ने एनजीटी के न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल को शिकायती पत्र भेजकर विश्वविद्यालय में हो रहे निर्माण कार्यों को एनजीटी की गाइड लाइन के विपरीत बताया था।
कहा था कि सुरहाताल जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार घोषित है। जेएनसीयू के निर्माणाधीन भवन को इस परिधि के भीतर बताया गया था। इस निर्माण को पक्षी विहार के लिए खतरनाक बताया गया है। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और न्यायिक सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने एक नवंबर को विवि की कुलपति को नोटिस जारी कर दो माह के भीतर जवाब मांगा था। साथ ही टीम गठित कर सत्यापन के लिए कई निर्देशित किया। कमेटी को भौतिक निरीक्षण कर रिपोर्ट देनी थी। निर्देश के क्रम में टीम का गठन हो गया है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. एसएसी शुक्ला ने बताया कि टीम में प्रभागीय वनाधिकारी काशी वन्य जीव प्रभाग, एसपी बलिया, जिलाधिकारी बलिया, प्रभागीय वनाधिकारी एवं सदस्य आगद्रभूमि समिति बलिया, नोडल अधिकारी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. एससी शुक्ला शामिल हैं। गठित संयुक्त समिति 29 दिसंबर को बैठक करेगी। इसके बाद निर्माण कार्य का स्थलीय सत्यापन करेगी। इसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाएगी।