संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबे छपरा के संयुक्त तत्वावधान में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में रुस-यूक्रेन संघर्ष एवं वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भारत के पूर्व राजदूत जेके तिवारी ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के वैश्विक प्रभाव से विकासशील राष्ट्रों को बहुत नुकसान पहुंच रहा है।
भारत की भूमिका एक मध्यस्थ राष्ट्र के रूप में आज दुनिया के सामने उभर कर आया है। जब भारत के साथ पाकिस्तान और चीन के युद्ध हुए तो दुनिया का कोई भी राष्ट्र मध्यस्थता के लिए जल्दी तैयार नहीं हुआ था। आज वैश्विक परिदृश्य में बदलाव का ही परिणाम है कि भारत से आज दुनिया कह रही है मध्यस्थ के रुप में भारत को आगे आना चाहिए। कहा कि भारत अब सन 1962 का नहीं रहा है।
विशिष्ट अतिथि अवकाश प्राप्त मेजर जनरल आरजीआर तिवारी ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के लंबा खींचने से गुरिल्ला युद्ध की संभावना बढ़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाले समय में राष्ट्रों को आंतरिक रुप से मजबूत होकर अपनी रक्षा करनी पड़ेगी। कहा कि इस संघर्ष के एक वर्ष पूर्ण हो गए अब आगे संघर्ष चलता है तो युद्ध की संभावना बलवती हो सकती है। यह अब नए शीत युद्ध की शुरुआत है जिसका समीकरण अब बदल गया है। इस मौके पर डॉ. श्याम बिहारी श्रीवास्तव, प्राचार्य प्रो. गौरीशंकर द्विवेदी, शिवेश प्रसाद, डॉ. अजय विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।