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अगर मिलें न कहीं ठिकाना तो हमारा पता संभाले रखना...

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बलिया। ऐतिहासिक ददरी मेले के भारतेंदु मंच रविवार को एकबार फिर मुशायरा का गवाह बना। मंच पर आयोजित राज्यस्तरीय मुशायरे में जहां शायरों ने अपनी नजमों से तालियां और श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। वहीं, लोगों का मनोरंजन भी किया। हालांकि अपेक्षानुरुप भीड़ नहीं होने से शायर मायूस और महफिल उदास जरूर नजर आई।
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मुशायरा का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व सभासद शकील अहमद ने फीता काटकर किया। संचालन कर रहे शंकर कैमूरी ने मुशायरा के दौरान अपनी शेरों से दर्शकों को खूब रिझाया। मुशायरे की शुरुआत विशाल सिंह ताबीश ने की, जिन्होंने सुनाया कि खुशबू के एहसास पर भागे पागल लोग...।, हम मुकाबिल से नहीं सकते, कद हमारे घट नहीं सकते...। इसके बाद इमरान बनारसी ने कौमी एकजहती से लबरेज कलाम में कहा कि एक मुहब्बत के सिवाय दुनिया में क्या रखा है...। भाइयों से मुझे कोई शिकायत नहीं, मेरी मां ने मेरे हिस्से में दुआ रखा। विभा शुक्ला ने अगर मिले न कहीं ठिकाना तो हमारा पता संभाले रखना...।, भंवर से उबरना चाहता है, मेरे दिल में उतरना चाहता हैं...। मुशायरा को आक्सीजन देने के लिए पहली बार भारतेंदु मंच पर आए शायर अमरीश ठाकुर ने अपने अनोखे तरन्नुम में कलाम में पेश किए। सुनाया कि सफर वीरान हो तो हवा और धूल भी नहीं मालूम होता है...। फिर सुनाया कि हवा का रुख बदलना चाहते हैं, दिए हैं जलना चाहते हैं...। दान बहादुर सिंह ने सुनाया कि बस आखिरी किस्सा है, अब मुझे वक्त के मानें भी जाते हैं....। इसके अलावा, सुल्तन जहां, अज्म शाकिल, शकील आजमी ने भी अपने शेरों से महफिल लूटी। इस अवसर पर नपा के ईओ एसपी सिंह, प्रमोद सिंह, अभिनव, राजाराम आदि मौजूद रहे।
अधिकारी के नाम पर हो रहा अग्रिम भुगतान
बलिया। ददरी मेल के आयोजन को लेकर इस बार नपा प्रशासन कायदे कानून ताक पर रखने में गुरेज नहीं कर रही है। भारतेंदु मंच पर आयोजित कार्यक्रमों के नाम पर हर बार मोटी रकम नपा के एक जेई के नाम पर भुगतान कर कार्यक्रम के नाम पर उसके द्वारा ही व्यय करा रही है। 18 नंवबर को आयोजित कव्वाली के नाम पर भी नपा ने उक्त जेई के नाम पर करीब पांच लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया था।
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