बांसडीह। कलियुग में मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिला है। मानव शरीर को प्राप्त करने के लिए देवता भी तप करते हैं। मानव शरीर की सार्थकता है कि शरीर प्राप्त करने की बाद मृत्यु निश्चित है। मृत्यु के बाद पुनर्जन्म न हो यही मानव जीवन की सार्थकता है। अब पुनर्जन्म न हो इसके लिए भगवान के नाम का सुमिरन ही एकमात्र साधन है। यह भवसागर से पार करता है। उक्त बातें स्वामी हरिहारानंद महाराज ने सोमवार को बड़ी बाजार में आयोजित दो दिवसीय राम नाम संकीर्तन के पूर्णाहुति पर कहीं। कहा कि कलियुग में व्यक्ति सिर्फ पैसा कमाने की होड़ में लगा हुआ है। चाहे पैसा बेईमानी, दूसरों से लूट कर ही क्यों न आए। भगवान रत्ती रत्ती का हिसाब रखते हैं। समय पर सबका भुगतान करते हैं। कलियुग में ईश्वर का संकीर्तन से मनुष्य का कल्याण हो सकता है। मनोज कुमार, मुरारी स्वर्णकार, कन्हैया गुप्ता, विजय गुप्ता, सोनू गुप्ता, संतोष चौहान, देव कुमार यादव, राजेश वर्मा थे।