बलिया। जनपद में इन दिनों मैरिज हॉल एवं होटलों की भरमार सी हो गई है। जगह-जगह मैरिज हॉल एवं होटल धड़ल्ले से खोले जा रहे हैं। लेकिन सुरक्षा मानकों का इनमें ध्यान नहीं रखा गया है। जनपद में केवल चार होटल संचालकों ने एनओसी लिया है। जबकि अधिकांश मैरिज हॉल एवं होटल संचालकों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं लिया है। यहां तक कि अपने यहां अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगाया है।
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मैरिज हॉल व होटल दर्जनों की संख्या में हैं। वर्तमान में और खोले भी जा रहे हैं। लेकिन किसी ने भी अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझा है और न ही अग्निशमन यंत्र रखा है। जबकि अग्निशमन विभाग द्वारा मैरिज हॉल व होटल संचालकों को बार-बार नोटिस भेजकर एनओसी लेने की चेतावनी दी जाती है। इसके अलावा जिलाधिकारी को भी अवगत कराया जाता है और उनकी ओर से भी सूचना जारी की जाती है। लेकिन संचालकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। अगर संयोगवश वसुंधरा मार्केट की भांति इन मैरिज हॉल व होटलों में कतिपय कारणों से आग लग जाती है तो उस पर काबू पाना अग्निशमन विभाग के लिए टेढ़ी खीर से कम नहीं होगा। आलम यह है कि चार-पांच होटल व मैरेज हॉल को छोड़ दिया जाए तो किसी भी मैरिज हॉल व होटल संचालकों ने मानक के अनुसार निर्माण नहीं कराया है और न ही एनओसी लिया है ताकि ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
यह होना है जरूरी
- मैरिज हॉल व होटल तक अग्निशमन गाड़ी जाने के लिए रास्ता तथा अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
- मैरिज हॉल और होटल में आपातकालीन खिड़की होनी चाहिए।
- मैरिज हॉल और होटल में दो पक्की सीढ़ी होनी चाहिए।
-आग बुझाने के लिए पानी की पाइप लाइन होनी चाहिए।
- मैरिज हॉल में पार्किगिं सिस्टम होना चाहिए।
- मैरिज हॉल और होटल के बाहर फिक्स फायर फाइटिंग सिस्टम होना चाहिए।
एनओसी के लिए मैरिज हॉल और होटल संचालकों को नोटिस भेजा जाता है। इसके अलावा डीएम को अवगत भी कराया जाता है। मैरिज हॉल व होटल संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकारी जिलाधिकारी के पास होता है। उनकी ओर से भी सूचना दी जाती है। - धीरेंद्र यादव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, बलिया।