बलिया। जनपद में कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) का प्रकोप बढ़ गया है। जिला अस्पताल से सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में 40 प्रतिशत मरीज आई फ्लू से पीड़ित आ रहे हैं। इसमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। चिकित्सक लोगों को संक्रमित व्यक्तियों से दूरी रखने की सलाह दे रहे हैं।
जिले के आई फ्लू यानी कंजक्टिवाइटिस रोग बड़े पैमाने पर फैल रहा है। हालात यह है कि सौ लोग में 40 की आंखों में यह समस्या मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से जिला अस्पताल में प्रतिदिन नेत्र रोग की ओपीडी में 100 से अधिक मरीज आंखों में पानी आने, लाल होने, किरकिराहट होने और दर्द और सूजन की शिकायत लेकर आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों की हालत और खराब है। आई फ्लू के डर से कई स्कूल दो से तीन दिन बंद है। कंजक्टिवाइटिस रोग को सामान्य भाषा में आंख आना कहा जाता है। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं। इस बीमारी में समय से इलाज और सावधानी बरतना जरूरी है। घरों में एक के बाद सभी सदस्य को संक्रमण हो रहा है। आई फ्लू वैसे तो ज्यादा खतरनाक बीमारी नहीं है लेकिन आंखों में होने के कारण एक कष्टदायक होती है।
कंजक्टिवाइटिस एक प्रकार से आंखों में होने वाला संक्रमण है, जो आंखों के संवेदनशील भाग कोन्जक्टिवा को प्रभावित करता है। इस संक्रमण में वायरस बैक्टीरिया या एलर्जी शामिल हो सकती है। मरीजों में खांसी, जुकाम और बुखार के बाद कंजक्टिवाइटिस की समस्या आ रही। बारिश और उमस भरी गर्मी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
आई फ्लू के लक्षण
कंजंक्टिवाइटिस वायरल बीमारी है। यह चार से पांच दिन में ठीक होती है। इसके होने से आंखें लाल सूजन युक्त व जलन या खुजली व आंखों से पानी आने लगता है। सुबह जगने पर आंख की पलकें आपस में चिपक जाती है। दर्द भी होता है।
आई फ्लू होने पर बरतें सावधानी
आई फ्लू हाेने पर संक्रमित से दूरी बनाए रखें और हाथ न मिलाएं। संक्रमण से बचने के लिए चश्मा पहनें। ठंडे पानी से दिन में दो बार आंखें धोएं। आई स्पेशलिस्ट की बताई ड्रॉप्स ही आंखों में डालें। मेडिकल स्टोर वालों की बताई दवाएं न लें, आंख खराब भी हो सकती है। आंख को मसले न, साफ कपड़े से साफ करे। हाथों को नियमित रूप से साफ करें।
बदलते मौसम के दिनों में आंखों में आई फ्लू की समस्या होती है। यह एक तरफ से संक्रमण बीमारी है। किसी को लक्षण होने पर उससे दूरी बना लें। इसमें साफ-सफाई बहुत जरूरी है। लक्षण होने पर चिकित्सक से संपर्क कर ड्राप का प्रयोग करें। - डा. बीपी सिंह, नेत्ररोग विशेषज्ञ