नरहीं। खरीफ की फसलों में धान की रोपाई का कार्य इस समय जोर शोर से जारी है। धान की रोपाई करने में काफी सावधानी रखनी चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने कहा कि स्वस्थ एवं रोग मुक्त नर्सरी ही अधिक व गुणवत्ता पूर्ण धान का उत्पादन का आधार होती है। खेतों की मेड़ों को रोपाई से पहले साफ सुथरा कर लेना चाहिए। इससे कीट नहीं पनपते हैं। धान की रोपाई जुलाई माह के मध्य तक अवश्य कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बाद उपज में निरंतर कमी होने लगती है। यह कमी 30 से 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में प्रतिदिन होती है। पौधों की रोपाई तीन से चार सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर नहीं करनी चाहिए। अन्यथा कल्ले कम निकलते हैं। उपज में कमी होती है। ा अच्छी उपज के लिए प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 250 से 350 बालियों की संख्या होनी चाहिए।