बलिया। रबी की फसल बोने की तैयारी में किसान जुट गए हैं, लेकिन किसान यूरिया, डीएपी की किल्लत से परेशान हैं। खास बात यह है कि साधन सहकारी समितियों से इस बार एक किसान को तीन से पांच बोरी तक ही डीएपी व यूरिया दिया जा रहा है। ऊपर से अगले वर्ष की तुलना में डीएपी की मूल्य प्रति बोरी 50 रुपये बढ़ गया है। एक अक्तूबर से पूर्व डीएपी की कीमत जहां 1150 रुपये प्रति बोरी थी इस बार 1200 रुपये प्रति बोरी के भाव से बिक रहा है। जबकि यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं है। इससे किसान एक तो डीएपी की किल्लत से जूझ रहे हैं वहीं मूल्य वृद्धि होने से बजट बिगड़ गया है।मौजूदा समय में किसानों में आलू बोने के लिए डीएपी की मांग बढ़ी है, जबकि 15 नवम्बर से गेहूं बोने का सीजन भी शुरू हो जाएगा। बैरिया तहसील क्षेत्र के विकास खंड बैरिया में कुल आठ साधन सहकारी समिति हैं, जबकि मुरलीछपरा ब्लॉक में पांच ऐसे में कुल 13 साधन सहकारी समितियां हैं। ऐसे में बैरिया व मुरलीछपरा ब्लॉक में करीब 14 हजार किसान है, इनमें से करीब पांच हजार किसान 500 एकड़ में आलू की बोआई करते हैं। इसके सापेक्ष एक साधन सहकारी समिति पर 250 से 300 बोरी ही डीएपी पहुंच सका है, कुल 13 साधन सहकारी समितियों पर महज 3200 बोरी ही डीएपी पहुंचा है। जबकि एक साधन सहकारी समिति पर कम से कम 600 बोरी डीएपी की खपत है। केवल कोटवां व हनुमानगंज-मानगढ़ साधन सहकारी समिति पर ही यूरिया उपलब्ध है। विभाग की मानें तो साधन सहकारी समितियों के अलावा हर ब्लॉक में दो से तीन फ्रेंचाइजी भी खुला है, जहां से डीएपी की बिक्री हो रही है।