जनपद के 3103 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में कहीं से भी आग लगने की घटना पर पहुंचना चुनौती है। छह तहसील, 17 ब्लॉक के 940 ग्राम पंचायतों के करीब पांच हजार गांव-मजरों तक पहुंचने के लिए सड़क के अलावा कई समस्याएं विभाग को झेलनी पड़ती हैं। इसमें पानी की सहज उपलब्धता और पहुंचने तक के रास्ते मुख्य हैं। शहर की कई गलियां ऐसी हैं, जहां दमकल की गाड़ी पहुंचना मुश्किल है। इसके बावजूद अग्निशमन विभाग खुद को सभी संसाधनों से लैस बता रहा है। जबकि हकीकत इसके उलट है।
आंकड़ों की बात करें तो वर्ष- 2021 में करीब 253 और वर्ष 2022 में लगभग 357 अग्निकांड की घटनाएं हुई थीं, जिनमें छह करोड़ 13 लाख 28 हजार पांच सौ रुपये की संपत्ति की क्षति हुई थी। हालांकि दमकल विभाग की सतर्कता के चलते दो करोड़ 26 लाख 53 हजार पांच सौ रुपये की संपत्ति को बचा लिया गया था। आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिले में पांच अग्निशमन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें जिले में सदर, रसड़ा, बांसडीह, बिल्थरारोड व बैरिया में फायर स्टेशन संचालित हैं। जबकि सिकंदरपुर में भवन का निर्माण चल रहा है।
नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। अग्निशमन विभाग में 14 के सापेक्ष मात्र पांच चालक ही तैनात हैं। अग्निशमन विभाग में पांच चालकों के भरोसे 13 गाड़ियां हैं। इसमें आठ फायर टेंडर बड़ी गाड़ी व पांच फायर मिस्ट छोटी गाड़ियां हैं। मैनपावर के साथ ही अत्याधुनिक संसाधनों का भी अभाव है। जनपद में 85 के सापेक्ष 49 फायरमैन उपलब्ध हैं।
50 हजार की आबादी पर हो एक दमकल केंद्र
वर्ष 2007 में तत्कालीन प्रमुख सचिव जेएन चेंबर ने नए मानक तय करते हुए शासनादेश जारी किया था। इसमें 50 हजार आबादी पर एक फायर यूनिट तय की गई थी। शहरी क्षेत्र में पांच किलोमीटर पर एक यूनिट को अनिवार्य किया गया था, ताकि आग लगने पर निर्धारित पांच मिनट के भीतर दमकल पहुंच सके, लेकिन आग से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाली रिपोर्ट और आदेश को जमीनी हकीकत देने के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से कोई योजना नहीं बनीं।
गर्मी में बढ़ती हैं आग की घटनाएं
आग की बड़ी घटनाओं को बात तो दूर छोटी घटनाएं भी चुनौती से कम नहीं हैं। जनपद में गर्मी के दिनों में हर साल आग से भारी तबाही होती है, इसमें करोड़ों का नुकसान होता है। सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। आग लगने पर उनकी गाढ़ी कमाई कुछ ही देर में बर्बाद हो जाती है।
राख पर ही पानी डालते हैं फायर ब्रिगेड के जवान
जिले का एक तिहाई हिस्सा दियारा का है। इस इलाके में कच्चे-पक्के मकान के अलावे लोग बड़ी संख्या में फूंस की झोपड़ी में रहते हैं। गर्मी के दिनों में दियारा के इलाके आग हर साल बड़ी तबाही मचाती है। अगलगी की घटनाओं में गांव के गांव जलकर नष्ट हो जातें है। अक्सर फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही सबकुछ जलकर राख हो जाता है। उपकरणों के साथ पहुंचने वाली टीम राख पर पानी डालकर अपने कर्तव्य पूरा कर वापस लौट जातें हैं।
बिजली के तारों से होती है घटनाएं
खेतों के ऊपर गुजरे अधिकांश तार ढीले हैं। तेज हवा चलने पर वह आपस में टकराते लिहाजा निकलने वाली चिंगारी शोला बन जाती है। कुछ ही देर में सैकड़ों एकड़ की फसल जलकर राख हो जाती है। जिस दिशा में हवा होती है उसी क्षेत्र में आग फैलती है। इससे एक के बाद एक खेत में आग बढ़ती चली जाती है।
खुद रहें सतर्क, ताकि हो सके सुरक्षा
- हवा का रुख देखकर आग जलाएं।
- बच्चों को माचिस आदि से न खेलने दें।
- चूल्हे की राख पूरी तरह से बुझाए बिना न फेंकें।
- शादी समारोह में चूल्हा ऐसी जगह जलवाएं जहां हवा न हो।
- घर, दुकान, संस्थान आदि में उपकरण लगाएं।
- ज्वलनशील वस्तुओं के पास बालू की बाल्टी रखें
- जलती बीड़ी-सिगरेट कहीं न फेकें।
- घटना होने पर तुरंत फायर सर्विस की मदद लें।
जिले पर एक नजर
- तहसीलें - 6
- विकास क्षेत्र- 17
- क्षेत्रफल - 3103 वर्ग किमी
- कुल आबादी - 3239774( वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार)
- थाना - 22
- फायर स्टेशन- 5
समस्याओं से समय-समय पर आला अधिकारियों को अवगत कराया जाता है। फिलहाल संसाधनों की कमी है। उपलब्ध संसाधनों से ही व्यवस्था संचालित की जा रही है।-धीरेंद्र सिंह यादव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, बलिया।